‘बांग्लादेश में शांति और लोकतंत्र के लिए…’, शेख हसीना की सजा पर भारत का रिएक्शन, करेगा प्रत्यर्पण?
Shaikh Hasina ICT News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा पर भारत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।
- Written By: अक्षय साहू
शेख हसीना की मौत की सजा पर भारत (सोर्स- सोशल मीडिया)
India on Sheikh Hasina Death Sentence: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा पर भारत ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि वह इस फैसले को गंभीरता से देख रहा है और बांग्लादेश के सर्वोत्तम हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
भारत सरकार के बयान में कहा गया कि उसने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा शेख हसीना के खिलाफ दिए गए फैसले को नोट किया है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि एक करीबी पड़ोसी के रूप में भारत हमेशा बांग्लादेश की जनता के हितों के प्रति संवेदनशील रहेगा।
बांग्लादेश की शांति-लोकतंत्र पर जोर
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और भारत हमेशा इन मूल्यों के समर्थन में खड़ा रहेगा। इसके साथ ही भारत ने यह भी कहा कि भविष्य में वह बांग्लादेश से जुड़े सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखेगा, ताकि देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक माहौल सुनिश्चित किया जा सके।
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Our statement regarding the recent verdict in Bangladesh⬇️
🔗 https://t.co/jAgre4dNMn pic.twitter.com/xSnshW6AzZ — Randhir Jaiswal (@MEAIndia) November 17, 2025
शेख हसीना को सोमवार को एक विशेष न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। यह सजा पिछले वर्ष जुलाई में उनके खिलाफ हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दी गई। हसीना पिछले वर्ष 5 अगस्त को अपनी सरकार गिरने के बाद से भारत में रह रही हैं। अदालत ने पहले उन्हें भगोड़ा घोषित किया था और अब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश (आईसीटी-बीडी) ने उनका दोष साबित किया।
क्या है अभियोजन पक्ष का आरोप?
न्यायाधिकरण ने ढाका में कड़ी सुरक्षा वाले अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के साबित कर दिया है कि 15 जुलाई से 15 अगस्त तक छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन पर हुई घातक कार्रवाई के पीछे हसीना की भूमिका थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे।
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अदालत ने पाया कि हसीना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग का आदेश दिया, भड़काऊ बयान दिए और ढाका सहित आसपास के इलाकों में छात्रों की हत्या के लिए अभियान चलाने की अनुमति दी। इसी कारण विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिससे बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल की आशंका जताई जा रही है।
