क्रूड-एलपीजी के बाद जंग की आग में झुलसने जा रही दवाइयां! फार्मा इंडस्ट्री पर दिखने लगा युद्ध का असर

Medicine Price Hike India: ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते भारत में दवाओं का कच्चा माल और पैकेजिंग महंगी हो गई है, जिससे जरूरी दवाओं की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की आशंका है।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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 Israel Iran War Impact: ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की तपिश अब सीधे आपकी मेडिकल किट तक पहुंच गई है। कच्चे माल की कमी और माल ढुलाई की बढ़ती लागत के कारण बुखार, शुगर और इन्फेक्शन जैसी बीमारियों की जरूरी दवाएं 10 से 20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती हैं‌।

भारत की फार्मा इंडस्ट्री काफी हद तक कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के आयात पर निर्भर है। फेडरेशन ऑफ फार्मा आंत्रप्रेन्योर्स (FOPE) के अनुसार, महज 8-9 दिनों के भीतर इन कच्चे माल की कीमतों में 20% से 60% तक का भारी उछाल देखा गया है‌।

किन दवाइयों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि सप्लाई चेन प्रभावित होने से पैरासिटामॉल, मेटफॉर्मिन (शुगर की दवा) और एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं के दाम बढ़ने तय हैं‌। ये वे दवाएं हैं जिन्हें देश के लाखों मरीज हर दिन अपनी जीवनशैली का हिस्सा मानते हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दवाइयों के दाम?

दवाओं के दाम बढ़ने के पीछे केवल युद्ध या रसायनों की कमी ही कारण नहीं है। दवा बनाने वाली कंपनियों के मुताबिक, पैकिंग मैटेरियल जैसे एल्यूमीनियम और प्लास्टिक की लागत में भी 30-40% का इजाफा हो गया है‌। दवा की शीशियां, बोतलें और फॉयल पेपर जैसी पैकेजिंग सामग्री कई गुना महंगी हो चुकी हैं। इसके अलावा, कार्गो शिप यानी माल ढोने वाले जहाजों की देरी और शिपिंग रूट्स में बदलाव के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है‌। जब तक कच्चा माल समय पर भारत नहीं पहुंचेगा, तब तक दवाओं का उत्पादन सामान्य नहीं हो पाएगा, जिससे बाजार में दवाओं की किल्लत होने का भी खतरा मंडरा रहा है।

क्या खत्म होने वाला है दवाओं का स्टॉक?

हालात की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न फार्मा संगठनों ने केंद्र सरकार को एक 'इमरजेंसी रिपोर्ट' सौंपी है‌। इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो देश में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो सकती है और वर्तमान प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट घाटे का सौदा बन जाएंगे‌।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति 10-15 दिनों में नहीं सुधरी, तो बाजार में मौजूद दवाओं का स्टॉक खत्म हो सकता है, जिससे ब्लैक मार्केटिंग और कालाबाजारी का खतरा भी बढ़ जाएगा‌। हालांकि, इसी बीच राहत की खबर यह है कि भारत ने युद्धक्षेत्र के पास अपने वॉरशिप तैनात किए हैं ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके‌।

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