भारत ला रहा खूंखार मिसाइल… वायुसेना 300 किमी दूर से कर सकेगी वार, दुश्मन होगा पस्त!
ICE Breaker Missile : नई पीढ़ी की स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों में इजरायल की ICE Breaker मिसाइल शामिल है। यह अब भारत आ रहा है। इसका इस्तेमाल वायुसेना करेगी। यह काफी खूंखार मिसाइल है।
- Written By: रंजन कुमार
इजराइल निर्मित मिसाइल। इमेज-सोशल मीडिया
ICE Breaker Missile News : आधुनिक युद्धों के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने जा रही है। भारत ने हाल ही में इजरायल के साथ दो बेहद एडवांस मिसाइल प्रणालियों का सौदा किया है, जिसमें सबसे अधिक चर्चा ‘आइस ब्रेकर’ (ICE Breaker) मिसाइल की हो रही है। अपनी सटीक मारक क्षमता और ‘अदृश्य’ तकनीक के कारण इसे दुनिया की सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है।
इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित यह मिसाइल हवा से जमीन और समुद्र पर मार करने वाली एक लॉन्ग-रेंज मिसाइल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 300 किलोमीटर की स्ट्राइक रेंज है। मतलब भारतीय फाइटर जेट दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) की जद में आए बिना, काफी दूर से ही हमला कर सकते हैं।
लो-ऑब्जर्वेबल डिजाइन पर आधारित मिसाइल
तकनीकी रूप से यह मिसाइल लो-ऑब्जर्वेबल डिजाइन पर आधारित है। यह जमीन से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीकर लगा है, जो लक्ष्य की पहचान खुद करता है। युद्ध के दौरान दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम भी कर दे, तब भी यह मिसाइल अपने एडवांस नेविगेशन सिस्टम की मदद से लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
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क्यों भारत के लिए है गेम-चेंजर?
250 से 300 किलोग्राम के विस्फोटक ले जाने में सक्षम यह मिसाइल दुश्मन के बंकर, कमांड सेंटर और युद्धपोतों को पलक झपकते ही खंडहर बना सकती है। भारतीय वायुसेना के लिए यह एक सुरक्षा कवच की तरह है, जो पायलट और विमान को जोखिम में डाले बिना दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को तबाह करने की ताकत देती है।
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इजरायल से और क्या आ रहा?
आइस ब्रेकर के साथ ही भारत इजरायल से रैम्पेज मिसाइल की नई खेप और बराक-8 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अपग्रेडेड वर्जन पर भी काम कर रहा है। साथ ही दोनों देशों के बीच हेरोन मार्क-2 (Heron MK II) ड्रोन्स को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चाएं अंतिम चरण में हैं, जो उपग्रह संचार के जरिए चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर लंबी दूरी तक निगरानी रखने में सक्षम हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हथियारों के आने से भारतीय सेना की स्टैंड-ऑफ हमले की क्षमता (दूर से वार करने की ताकत) कई गुना बढ़ जाएगी।
