डिजिटल जनगणना 2027: 1.4 अरब लोगों की गिनती के लिए डिजिटल महाअभियान तैयार, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल
Digital Census 2027: भारत की 2027 की जनगणना दुनिया की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनसंख्या गणना होगी, जिसके लिए 11,718 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जानिए इससे जुड़ी खास बातें।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Digital Census India 2027: भारत की 2027 की जनगणना के इस ऐतिहासिक अभ्यास में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए 1.4 अरब से अधिक लोगों का डेटा रीयल-टाइम में एकत्र और संसाधित किया जाएगा। इस जनगणना में कई बड़े बदलाव भी किए गए हैं।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय (ORGI) के तहत आयोजित होने वाली यह 16वीं जनगणना देश के भविष्य की नीतियों और विकास का आधार बनेगी। इस डिजिटल रूपांतरण की कुछ खूबियां और ढांचे इस प्रकार से हैं-
दो चरणों वाली व्यापक प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो मुख्य स्टेप्स में विभाजित किया गया है:
पहले चरण में मकान सूचीबद्ध करना (HLO): यह प्रक्रिया 16 अप्रैल, 2026 से शुरू होकर 15 मई तक चलेगी। इसमें देश के सभी भवनों की जियो-टैगिंग की जाएगी और प्रत्येक संरचना को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। यह चरण सीधे तौर पर जल जीवन मिशन और पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करेगा।
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दूसरे चरण में जनसंख्या गणना (PE): यह मुख्य गणना फरवरी 2027 में होगी, जिसके लिए 1 मार्च, 2027 को राष्ट्रीय संदर्भ तिथि माना गया है। हालांकि, बर्फबारी वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर) के लिए यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।
33 सवालों का डिजिटल फ्रेमवर्क
डिजिटल गणना के दौरान परिवारों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिन्हें कुछ ऐसी सीरीज में बांटा गया है-
मकान और परिवार: मकान की बनावट (7 सवाल) और परिवार के सदस्यों व मुखिया की जानकारी (8 सवाल)।
सुविधाएं और संपत्ति: पेयजल, बिजली और ईंधन (9 सवाल) तथा वाहनों और अन्य संपत्तियों पर जानकारी (4 सवाल)।
डिजिटल कनेक्टिविटी: पहली बार स्मार्टफोन और इंटरनेट के स्वामित्व से संबंधित 5 विशिष्ट सवाल पूछे जाएंगे।
ऐतिहासिक जाति गणना की भी होगी वापसी
इस जनगणना का सबसे जरुरी पहलू 1931 के बाद पहली बार व्यापक जाति गणना का समावेश है। अप्रैल 2025 में कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) द्वारा अनुमोदित यह पहल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अन्य समूहों के वास्तविक आंकड़े उपलब्ध कराएगी। यह डेटा कल्याणकारी नीतियों के बेहतर लक्ष्यीकरण और समावेशी विकास रणनीतियों की नींव रखेगा।
मॉडर्न टेक्नोलॉजी और डेटा सिक्योरिटी
जनगणना प्रक्रिया को उन्नत बनाने के लिए सी-डीएसी (C-DAC) द्वारा विकसित चार प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा-
स्वयं जनगणना पोर्टल (se.census.gov.in): नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे, जिससे उन्हें 16 अंकों की आईडी प्राप्त होगी।
HLO मोबाइल ऐप: यह 16 भाषाओं और ऑफलाइन मोड को सपोर्ट करता है।
HLBC और CMMS: उपग्रह-इमेज आधारित मैपिंग और 32 लाख फील्ड कर्मियों की रीयल-टाइम निगरानी के लिए डैशबोर्ड।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि डेटा की सुरक्षा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के मानकों के अनुरूप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के माध्यम से की जाएगी।
कौन हैं ‘प्रगति’ और ‘विकास’?
जनसंख्या भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘प्रगति’ और ‘विकास’ नामक दो शुभंकर पेश किए गए हैं। स्कूलों में पीटीएम, नुक्कड़ नाटकों और गली-गली मुनादी के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने यह मानवीय निर्णय लिया है कि दोपहर के समय फील्ड विजिट नहीं होगी, ताकि कर्मियों और जनता दोनों को असुविधा न हो।
इस जनगणना से क्या फायदा होगा?
इस जनगणना से प्राप्त डेटा का प्रभाव कई मोर्चों पर पड़ने का दावा किया जा रहा है।
निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन: 1971 के बाद पहली बार अद्यतन आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन हो सकता है।
सटीक शासन: संपत्ति और आय के विस्तृत डेटा से सरकारी योजनाओं का वितरण अधिक सटीक होगा।
आपदा प्रबंधन: भू-टैग डेटा आपदाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया में मदद करेगा।
