इमरान प्रतापगढ़ी(फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः शायर व राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुजरात के जामनगर में कथित तौर पर एक ‘भड़काऊ’ गाने के साथ संपादित वीडियो साझा करने के आरोप में दर्ज मामले की कार्रवाई पर कोर्ट ने मंगलवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने प्रतापगढ़ी द्वारा दायर अपील पर गुजरात सरकार और शिकायतकर्ता किशनभाई दीपकभाई नंदा को नोटिस जारी किया।
पीठ ने अगली सुनवाई की तारीख 10 फरवरी तय करते हुए कहा, ‘‘नोटिस जारी करें। दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रतापगढ़ी का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि गुजरात उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किए बिना ही उनके मुवक्किल की याचिका खारिज कर दी।
कांग्रेस नेता ने गुजरात उच्च न्यायालय के 17 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जांच बहुत प्रारंभिक चरण में है। जामनगर में आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह की पृष्ठभूमि में कथित ‘भड़काऊ’ गीत के लिए तीन जनवरी को प्रतापगढ़ी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतापगढ़ी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने) और धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिकूल आरोप, दावे) सहित विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
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प्रतापगढ़ी द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई 46 सेकंड की वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि जब वह हाथ हिलाते हुए चल रहे थे तो उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जा रही थीं और पृष्ठभूमि में एक गाना बज रहा था। प्रतापगढ़ी ने प्राथमिकी रद्द करने के लिए दाखिल याचिका में दावा किया कि पृष्ठभूमि में पढ़ी जा रही कविता ‘‘प्रेम और अहिंसा का संदेश” देती है। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिकी का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने के लिए एक हथियार के रूप में किया गया था और इसे ‘‘दुर्भावनापूर्ण इरादे और गलत मंशा” के साथ दर्ज किया गया था।