ममता बनर्जी व हुमायूं कबीर (डिजाइन फोटो)
West Bengal Assembly Elections: पिछले साल टीएमसी से निकाले गए हुमायूं कबीर भी इस बार अपनी नई नवेली जनता उन्नयन पार्टी के रथ पर सवार होकर पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतर गए हैं। उसके लिए उन्होंने 15 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है।
हुमायूं कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी राज्य में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीते साल हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस वजह से बंगाल सहित पूरे देश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
हुमायूं ने बताया कि उन्होंने मालदा और मुर्शिदाबाद जिले के विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है और पूरी लिस्ट रविवार को जारी करेंगे। पश्चिम बंगाल की सबसे हॉट सीट भवानीपुर से भी उन्होंने उम्मीदवार उतराने का ऐलान किया है।
हुमायूं कबीर ने राज्य की सीएम और टीएमसी मुखिया ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी पार्टी से गैर-बंगाली मुस्लिम उम्मीदवार पूनम बेगम को चुनावी मैदान में उतार दिया है। इस सीट पर ममता बनर्जी के सामने बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी हैं जिस वजह से इस सीट पर पूरे देश की नजर है।
JUP मुखिया ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ मिलकर कुछ सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भवानीपुर में एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारने का हुमायूं कबीर का फैसला टीएमसी के अल्पसंख्यक वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी हो सकता है।
हुमायूं खुद मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ेंगे। हुमायूं खुद अपने पुराने राजनीतिक पकड़ वाले क्षेत्र भरतपुर से अलग होकर चुनाव लड़ेंगे। पिछलने चुनाव में उन्होंने भरतपुर सीट से जीत दर्ज की थी। JUP ने कंडी से कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद यासीन हैदर, पुरबा बर्धमान के पुरबस्थली उत्तर से बापन घोष और बेलडांगा से सैयद अहमद कबीर को टिकट दिया है।
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मालदा में हुमायूं कबीर की पार्टी ने रतुआ से रॉयल इस्लाम, बैष्णवनगर से मुस्कुरा बीबी, मालतीपुर से अब्दुल मिनाज शेख, मानिकचक से अबू शाहिद और सुजापुर से नसीमुल हक को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही भरतपुर से सैयद खुबैब अमीन, फरक्का से इम्तियाज मोल्ला, बेहाला पूर्व से अनुपम रोहदगीर और हरिहरपारा से बिजय शेख शामिल हैं। हुमायूं मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में अपनी पार्टी को एक वैकल्पिक राजनीतिक प्लेटफॉर्म देने की कोशिश में जुटे हैं।