‘3 बार वोट नहीं दिया तो हमेशा के लिए काट दें नाम’, संसद में हनुमान बेनीवाल की इस मांग से खलबली
Hanuman Beniwal: संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा, राजनीति की चर्चा चरम पर है, इस समय सभी मुद्दों पर SIR का मुद्दा सबसे ज्यादा भारी है। ECI के इस अभियान पर राजस्थान से MP हुनमान बेनीवाल ने अलग मांग कर दी।
- Written By: सौरभ शर्मा
संसद में हनुमान बेनीवाल की इस मांग से खलबली (फोटो- सोशल मीडिया)
Hanuman Beniwal in Parliament on Voter List Name Cut: संसद के शीतकालीन सत्र में राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने एक ऐसा सुझाव दे दिया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। अक्सर अपने तीखे तेवरों और बेबाक बयानों के लिए मशहूर बेनीवाल ने चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान कहा कि जो लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं करते, उन पर अब सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संसद में खड़े होकर साफ शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति लगातार तीन बार वोट नहीं डालता है, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हमेशा के लिए काट देना चाहिए ताकि लोग जागरूक बनें।
देश के कई राज्यों में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच बेनीवाल का यह बयान नई बहस छेड़ने वाला है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर से लगातार दूसरी बार सांसद बने हनुमान बेनीवाल ने सदन में अनिवार्य वोटिंग की पुरजोर वकालत की। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट तो बहुत लंबी होती जाती है लेकिन जब नतीजे आते हैं तो वोटिंग प्रतिशत कम रहता है। ऐसे में जो लोग अपने वोट की कीमत नहीं समझते और जागरुक नहीं हैं, उन्हें लिस्ट में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
वोट नहीं तो अधिकार नहीं
हनुमान बेनीवाल ने सदन में सुझाव देते हुए कहा कि मैं तो यह मांग करूंगा कि देश में वोटिंग को अनिवार्य कर दिया जाए ताकि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। अगर सरकार ऐसा नहीं कर सकती है, तो कम से कम यह नियम बना दें कि जिसने तीन बार वोट नहीं डाला, यह मान लिया जाए कि वह जागरूक नहीं है और उसका वोट काट दिया जाए। बेनीवाल का मानना है कि फर्जी वोटिंग रोकने और सही आंकड़े सामने लाने के लिए ऐसे कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अक्सर दूसरे तरीकों से वोट डलवा दिए जाते हैं, जिससे लोकतंत्र कमजोर होता है।
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मजदूरों की चिंता और लोकतंत्र
सख्ती की बात करने के साथ ही हनुमान बेनीवाल ने गरीबों और मजदूरों की पैरवी भी की। उन्होंने राजस्थान में चल रहे एसआईआर अभियान की समय सीमा एक महीना बढ़ाने की मांग की है। बेनीवाल ने कहा कि दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज के लोग कमाने के लिए गुजरात, दक्षिण भारत और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में रहते हैं। एसआईआर की अंतिम तारीख 11 है और वे इतनी जल्दी दस्तावेज नहीं जुटा पाएंगे। सांसद ने आग्रह किया कि इसका समय एक महीने के लिए बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र तभी जिंदा रहेगा जब हर व्यक्ति को वोट का अधिकार मिलेगा और किसी का नाम गलत तरीके से नहीं कटेगा।
