Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

राज्यपाल नहीं रोक सकते विधेयक…लेकिन शक्ति पर पाबंदी नहीं, प्रेसिडेशियल रेफरेंस पर ‘सुप्रीम’ फैसला

Presidential Reference News: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भेजे 14 संवैधानिक सवालों पर राय दी है।

  • By अभिषेक सिंह
Updated On: Nov 20, 2025 | 12:31 PM

कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)

Follow Us
Close
Follow Us:

Supreme Court on Presidential Reference: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भेजे 14 संवैधानिक सवालों पर राय दे रही है। जो कि गवर्नर और प्रेसिडेंट के बिल पर कार्रवाई करने के टाइमफ्रेम और पावर से जुड़े हैं।

यह रेफरेंस उस फैसले के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गवर्नर और प्रेसिडेंट को पास हुए बिल पर एक तय टाइमफ्रेम के अंदर फैसला करना होगा। प्रेसिडेंट ने चिंता जताई कि इससे कॉन्स्टिट्यूशनल लिमिट का उल्लंघन होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ की तस्वीर

दस दिन की सुनवाई के बाद रिज़र्व रखे गए इस फैसले का फेडरल स्ट्रक्चर, राज्यों के अधिकारों और गवर्नर की भूमिका पर बड़े पैमाने पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने यह साफ किया है कि वह गवर्नर और प्रेसिडेंट के लिए टाइमफ्रेम कैसे तय कर सकता है और उनके फैसले आर्टिकल 200 और 201 के तहत ज्यूडिशियल रिव्यू के अंतर्गत आते हैं।

सम्बंधित ख़बरें

EPFO Salary लिमिट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 15000 की सीमा बढ़ाने पर 4 महीने में होगा निर्णय

जो देश के लिए 30 अवार्ड जीता वो अब अपराधी…सुप्रीम कोर्ट में बोले सोनम वांगचुक, कोर्ट ने क्या कहा?

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में ढाई घंटे चली सुनवाई, कोर्ट ने दिया ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट में महिला ने जजों को कहा ‘गाइज’, जस्टिस विक्रम नाथ की प्रतिक्रिया ने जीता दिल

राज्यपाल नहीं रोक सकते बिल: SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवर्नर किसी बिल को मंज़ूरी देने में अनिश्चित काल तक देरी नहीं कर सकते, लेकिन यह भी साफ किया कि डेडलाइन तय करना पावर के सेपरेशन के प्रिंसिपल (Separation of Powers) का उल्लंघन होगा।

‘पाबंदी लगाना अधिकार के बाहर’

चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अगुवाई वाली बेंच ने अपने पहले के फैसले को पलट दिया, जिसमें गवर्नर और प्रेसिडेंट को राज्य के बिलों पर तीन महीने के अंदर फैसला करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अधिकारियों पर सख्त टाइमलाइन लगाना ज्यूडिशियरी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

राज्यपाल के पास होंगे तीन विकल्प

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत जैसे डेमोक्रेटिक देश में गवर्नर के लिए डेडलाइन तय करना संविधान द्वारा गारंटीकृत फ्लेक्सिबिलिटी की भावना के खिलाफ है। बेंच ने साफ किया कि गवर्नर के पास सिर्फ तीन संवैधानिक ऑप्शन हैं- बिल पर सहमति, इसे दोबारा विचार के लिए असेंबली को वापस करना, या इसे प्रेसिडेंट के पास भेजना।

बेवजह देरी पर ज्यूडिशियल जांच

गवर्नर बिलों को अनिश्चित समय तक रोककर लेजिस्लेटिव प्रोसेस में रुकावट नहीं डाल सकते। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि ज्यूडिशियरी कानून बनाने के प्रोसेस में दखल नहीं दे सकती, लेकिन साफ ​​किया कि “बेवजह, अनिश्चित समय की देरी ज्यूडिशियल जांच के अधीन है।”

और क्या कुछ बोला सुप्रीम कोर्ट?

गवर्नर के अधिकार की संवैधानिक सीमाओं को रेखांकित करते हुए, बेंच ने कहा कि एकतरफा बिलों को रोकना फेडरलिज्म का उल्लंघन होगा। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा, “अगर गवर्नर लेजिस्लेटिव असेंबली से पास हुए बिल को आर्टिकल 200 में बताए गए प्रोसेस को फॉलो किए बिना रोकते हैं, तो यह फेडरल स्ट्रक्चर के हितों के खिलाफ होगा।”

कोर्ट ने कहा कि जब दो इंटरप्रिटेशन मुमकिन हों, तो वह इंटरप्रिटेशन अपनाई जानी चाहिए जो कॉन्स्टिट्यूशनल इंस्टीट्यूशन के बीच बातचीत और कोऑपरेशन को बढ़ावा दे। कोर्ट ने कहा कि इंडियन फेडरलिज्म की किसी भी डेफिनिशन में यह मंज़ूर नहीं होगा कि गवर्नर किसी बिल को हाउस में वापस किए बिना अनिश्चित काल के लिए रोके रखे।

यह भी पढ़ें: नीतीश कुमार तोड़ पाएंगे पवन चामलिंग का रिकॉर्ड? जानें इतिहास रचने के लिए कितने दिन और रहना होगा सीएम

सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि प्रेसिडेंट के लिए बिल रिज़र्व रखना भी इंस्टीट्यूशनल बातचीत का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉन्स्टिट्यूशनल पदों पर बैठे लोगों को टकराव या रुकावट पैदा करने के बजाय बातचीत और कोऑपरेशन की भावना अपनानी चाहिए।

Governor cannot stop bill but powers limited supreme court on presidential reference

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Nov 20, 2025 | 12:31 PM

Topics:  

  • BR Gavai
  • Legal News
  • Supreme Court

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.