मोदी सरकार बदलेगी इनकम टैक्स कानून, बजट सत्र में पेश हो सकता है नया आयकर विधेयक
New Income Tax Act: 63 साल पुराने इनकम टैक्स कानून की जगह नया कानून लाया जा सकता है। बजट सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
मोदी सरकार बदलेगी इनकम टैक्स कानून, बजट सत्र में पेश हो सकता है नया आयकर विधेयक
नई दिल्ली: सरकार संसद के आगामी बजट सत्र में एक नया आयकर विधेयक पेश कर सकती है, जिसका उद्देश्य वर्तमान आयकर कानून को सरल बनाना, उसे समझने योग्य बनाना तथा पृष्ठों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की कमी करना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई के बजट में छह महीने के भीतर छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा की थी।
एक सूत्र ने बताया कि नया आयकर कानून संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। यह एक नया कानून होगा, न कि मौजूदा कानून में संशोधन। वर्तमान में, कानून के मसौदे पर विधि मंत्रालय विचार कर रहा है और बजट सत्र के दूसरे भाग में इसे संसद में पेश किया जा सकता है।
इनकम टैक्स के निए नया कानून
बजट सत्र 31 जनवरी से चार अप्रैल तक चलेगा। पहला भाग (31 जनवरी-13 फरवरी) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्य सभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने के साथ शुरू होगा, जिसके बाद 2024-25 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। संसद 10 मार्च को पुनः आरंभ होगी और चार अप्रैल तक चलेगी।
सम्बंधित ख़बरें
FY2027 के लिए इनकम टैक्स डेडलाइन्स: जानें ITR फाइलिंग और TDS सर्टिफिकेट की जरूरी तारीखें
अब चुटकियों में फाइल होगा ITR! इनकम टैक्स विभाग ने लॉन्च की नई वेबसाइट, AI असिस्टेंट करेगा मदद
Income Tax: आज से लागू हुआ नया नियम, सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स छूट में हुए बड़े बदलाव, जानें सबकुछ
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बढ़ी मुश्किलें, आयकर विभाग ने ₹296 करोड़ का भेजा डिमांड नोटिस; क्या है पूरा मामला?
आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा के लिए सीतारमण द्वारा बजट घोषणा के बाद सीबीडीटी ने समीक्षा की देखरेख करने और अधिनियम को संक्षिप्त, स्पष्ट और समझने में आसान बनाने के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया था। इससे विवाद, मुकदमेबाजी कम होगी और करदाताओं को अधिक कर निश्चितता मिलेगी। इसके साथ ही अधिनियम के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए 22 विशेष उप-समितियां स्थापित की गई हैं। चार श्रेणियों – भाषा का सरलीकरण, मुकदमेबाजी में कमी, अनुपालन में कमी, तथा अनावश्यक/अप्रचलित प्रावधान में जनता से सुझाव और सूचनाएं आमंत्रित की गईं।
देश की ख़बरों के लिए यहां क्लिक करें!
क्या बदलेगा?
आयकर विभाग को अधिनियम की समीक्षा के लिए हितधारकों से 6,500 सुझाव प्राप्त हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रावधानों और अध्यायों में उल्लेखनीय कमी की जाएगी तथा अप्रचलित प्रावधानों को हटाया जाएगा। व्यक्तिगत आयकर, कॉरपोरेट कर, प्रतिभूति लेनदेन कर जैसे प्रत्यक्ष करों के अलावा उपहार और संपत्ति कर के अधिरोपण से संबंधित आयकर अधिनियम, 1961 में वर्तमान में लगभग 298 धाराएं और 23 अध्याय हैं। सूत्र ने कहा, “प्रयास यह है कि कर की मात्रा में लगभग 60 प्रतिशत की कटौती की जाए।”
सीतारमण ने जुलाई, 2024 के अपने बजट भाषण में कहा था कि समीक्षा का उद्देश्य अधिनियम को संक्षिप्त, सुस्पष्ट, पढ़ने और समझने में आसान बनाना है। उन्होंने कहा था कि इससे विवाद और मुकदमेबाजी कम होगी, जिससे करदाताओं को कर निश्चितता मिलेगी। इससे मुकदमेबाजी में उलझी मांग में भी कमी आएगी। इसे छह महीने में पूरा करने का प्रस्ताव है।(एजेंसी इनपुट के साथ)
