नया इनकम टैक्स एक्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
New Income Tax Act Salary Impact: भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax एक्ट 2025 आधिकारिक तौर पर लागू हो चुका है। इस नए कानून और लेबर कोड के आने से नौकरीपेशा लोगों की इन-हैंड सैलरी की गणना अब पूरी तरह बदल गई है। नए आयकर अधिनियम के वेतन पर प्रभाव को समझना अब हर कर्मचारी के लिए बहुत जरूरी हो गया है। सरकार ने टैक्स छूट की सीमाओं में विस्तार कर आम जनता को बड़ी राहत देने का प्रयास किया है।
नए लेबर कोड के लागू होने से अब कर्मचारियों की सैलरी की परिभाषा पूरी तरह से बदल जाएगी। नए नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी का बेसिक पे उसकी कुल सीटीसी का कम से कम 50% होना अनिवार्य है। अभी तक कई कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक पे कम रखती थीं और अलाउंस बढ़ा देती थीं।
जब बेसिक पे बढ़ेगा तो कर्मचारी के पीएफ और ग्रेच्युटी में होने वाला योगदान भी अपने आप बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि भविष्य के लिए आपका रिटायरमेंट फंड तो मजबूत होगा लेकिन हर महीने मिलने वाली सैलरी कम हो जाएगी। इन बदलावों का सीधा असर आपकी मासिक बचत और खर्च करने की क्षमता पर साफ देखने को मिल सकता है।
पुराने टैक्स रिजीम को चुनने वाले लोगों के लिए एचआरए छूट के नियमों में एक बहुत ही सुखद बदलाव किया गया है। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी मेट्रो शहरों में शामिल किया गया है। इन शहरों में रहने वाले किराएदारों को अब 50% एचआरए छूट का लाभ मिल सकेगा जिससे भारी टैक्स बचत होगी।
बच्चों की शिक्षा पर मिलने वाली Tax छूट को सरकार ने 100 रुपये से बढ़ाकर सीधे 3,000 रुपये प्रति महीना कर दिया है। इसके साथ ही हॉस्टल खर्च की छूट को भी 300 रुपये से बढ़ाकर अब 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह बदलाव मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई के खर्च में टैक्स बचाने का एक बहुत बड़ा अवसर लेकर आया है।
कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों को मिलने वाले मील कार्ड पर भी Tax-फ्री लिमिट को अब बढ़ा दिया गया है। अब कंपनी की तरफ से मिलने वाले मील कार्ड पर प्रति भोजन 50 रुपये के बजाय 200 रुपये तक की छूट मिलेगी। यह कदम बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों के खान-पान के खर्च में राहत देने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया है।
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अगर आपको अपनी कंपनी की तरफ से कार मिली है तो अब उसकी परक्विजिट वैल्यू पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है। अब 1.6 लीटर से कम इंजन वाली कारों पर 8 हजार रुपये और बड़ी कारों पर 10 हजार रुपये प्रतिमाह टैक्स लगेगा। पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों को भी टैक्स के दायरे में लाया गया है जिससे कार इस्तेमाल करना अब महंगा हो गया है।