आपकी गोपनीय जानकारी लीक कर रही थीं कई वेबसाइट्स, रोकने के लिए सरकार ने उठाए ये बड़े कदम
नागरिकों के डेटा को और अधिक सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए केन्द्रीय सूचना और प्रद्यौगिकी मंत्रालय ने गुरुवार को दो बड़े कदम उठाए हैं। जिससे आपकी गोपनीय जानकारियों को और सुरक्षित किया जा सके।
- Written By: अभिषेक सिंह
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: नागरिकों के डेटा को और अधिक सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने आधार और पैन कार्ड की जानकारी को उजागर करने वाली सभी वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया है। साथ ही, राज्य के आईटी सचिव को डेटा गोपनीयता उल्लंघन के लिए शिकायतों को हल करने और मुआवजे का अधिकार दिया गया।
सरकार की तरफ से कहा गया कि वह एक खुला, सुरक्षित और विश्वसनीय, जवाबदेह इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि कुछ वेबसाइट भारतीय नागरिकों के आधार और पैन कार्ड विवरण सहित संवेदनशील व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी को उजागर कर रही हैं। इसे गंभीरता से लिया गया है क्योंकि सरकार सुरक्षित साइबर सुरक्षा प्रथाओं और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इसके अनुसार, इन वेबसाइटों को ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई है। विज्ञापन
UIDAI ने दर्ज कराई शिकायत
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 की धारा 29(4) के तहत आधार जानकारी के सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई है।
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भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल द्वार किए गए इन वेबसाइटों के विश्लेषण से पता चला है कि इन वेबसाइटों में कुछ सुरक्षा कमजोरियाँ हैं। संबंधित वेबसाइट स्वामियों को ICT अवसंरचना को मजबूत करने और कमजोरियों को ठीक करने के लिए उनके स्तर पर की जाने वाली कार्रवाइयों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया गया है।
स्टेट IT सचिवों को दी गई शक्तियाँ
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियम, 2011 को अधिसूचित किया है, जो संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के गैर-प्रकाशन और गैर-प्रकटीकरण का प्रावधान करता है। कोई भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित पक्ष आईटी अधिनियम की धारा 46 के तहत शिकायत दर्ज करने और मुआवजे की माँग करने के लिए निर्णायक अधिकारी से संपर्क कर सकता है। राज्यों के आईटी सचिवों को आईटी अधिनियम के तहत निर्णायक अधिकारी के रूप में सशक्त बनाया गया है।
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इसके अलावा, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 पहले ही लागू हो चुका है और इस अधिनियम के तहत नियम मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में हैं। सरकार, उद्योग और नागरिकों को इसके प्रभाव से अवगत कराने के उद्देश्य से एक जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। इससे विभिन्न हितधारकों के बीच जिम्मेदार उपयोग और सक्रिय उपायों के बारे में देशव्यापी जागरूकता और समझ पैदा करने में मदद मिलेगी, जिससे विभिन्न संस्थाओं द्वारा व्यक्तिगत डेटा के अनावश्यक प्रदर्शन पर अंकुश लगेगा।
