वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Galgotia University: देश की राजधानी दिल्ली में हुए AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में घिर गई है। एक चीनी रोबोट को अपना बताकर पेश करने के विवाद के बाद एक और प्रोडक्ट जांच के दायरे में आ गया है। इस बार विवाद एक सॉकर ड्रोन को लेकर है, जिसके बारे में गलगोटिया ने दावा किया था कि वह उसका अपना है, लेकिन वह साउथ कोरिया में बना हुआ निकला।
इससे पहले यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने चीन में बने रोबोडॉग को अपना बताकर पेश किया था, जिससे काफी शर्मिंदगी हुई थी। इसके लिए यूनिवर्सिटी को चीनी मीडिया में भी काफी ट्रोल किया गया था। सरकार ने तुरंत यूनिवर्सिटी को समिट से पवेलियन खाली करने का आदेश दिया।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि सॉकर ड्रोन को शुरू से बनाया गया था। रोबोडॉग विवाद में शामिल कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह एक रिपोर्टर को सॉकर ड्रोन के बारे में समझा रही हैं।
प्रोफेसर ने बताया कि यह एक बहुत ही दिलचस्प प्रोजेक्ट है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लीकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है, जिसे आप गलगोटिया के कैंपस में देख सकते हैं। बच्चे यहां गेम खेलते हैं और उड़ाते हैं। वे इसे नए तरीके से और दमदार फीचर्स के साथ डेवलप कर रहे हैं। हालांकि प्रोफेसर का यह दावा भी पुराने जैसा ही निकला।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कैंपस में ‘स्क्रैच से बना भारत का पहला ड्रोन सॉकर’ होने का दावा किया। हकीकत सामने आई तो वह कोरिया का Striker V3 ARF सिस्टम निकला।
मेक इन इंडिया के नाम पर ऐसे दावे देश की साख पर सवाल खड़े करते हैं। मोदी जी, क्या इसी तरह भारत को विश्वगुरु बनाया जाएगा? pic.twitter.com/CnlCS3Nj2o — Amit Pathania (@amit1pathania) February 18, 2026
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि यह प्रोडक्ट साउथ कोरिया के हेलसेल ग्रुप के बनाए सॉकर ड्रोन जैसा है। चीनी रोबोट की तरह यह प्रोडक्ट भी एक वेबसाइट पर करीब 40,000 रुपये में कमर्शियली उपलब्ध है।
रोबोट विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI समिट में अपना पवेलियन खाली करने का आदेश दिया गया। इसके बाद लाइट भी काट दी गई, जिससे यूनिवर्सिटी की काफी बेइज्जती हुई। प्रोफेसरों और स्टाफ को हटा दिया गया और जगह खाली कर दी गई।
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विवाद के बाद इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई भी एग्जिबिटर ऐसी चीजें दिखाए जो उसकी अपनी न हों। कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि किसी दूसरे के बनाए उत्पाद को अपना मौलिक उत्पाद बताकर प्रदर्शित करे।