KP Unnikrishnan passes away (Source. X)
Former Union Minister And Congress leader Passed Away: केरल और राष्ट्रीय राजनीति के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री केपी उन्नीकृष्णन का कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके जाने से भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण और वैचारिक आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई।
जानकारी के अनुसार, केपी उन्नीकृष्णन पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और कोझिकोड के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने एक ऐसे वरिष्ठ नेता को खो दिया है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन को वैचारिक मजबूती और लोकतांत्रिक मूल्यों से समृद्ध किया।
केपी उन्नीकृष्णन उस पीढ़ी के नेताओं में शामिल थे, जो संसद को केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि विचारों और सिद्धांतों का मंच मानते थे। उनकी राजनीति में सिद्धांतों की स्पष्टता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता साफ झलकती थी।
Kerala | Former Union Minister and senior Congress leader K.P. Unnikrishnan passed away at a private hospital in Kozhikode today Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan has expressed deep condolences on the passing of former Union Minister KP Unnikrishnan (file pic of KP… pic.twitter.com/SLulvJC9sI — ANI (@ANI) March 3, 2026
केरल की राजनीति में उनका स्थान अलग ही रहा। समाजवादी सोच से प्रभावित उन्नीकृष्णन ने लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के दौर में वे केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे और आपातकाल के समय तानाशाही प्रवृत्तियों के मुखर आलोचक के रूप में सामने आए। उनकी राजनीतिक यात्रा स्वतंत्रता के बाद भारत में हुए वैचारिक बदलावों और संघर्षों का आईना रही।
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उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से की थी। बाद में 1962 में वे कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने और यहीं से राष्ट्रीय राजनीति में उनका लंबा और प्रभावशाली सफर शुरू हुआ।
1971 में वडाकारा से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने मजबूत जनाधार के दम पर ऐसा व्यक्तिगत प्रभाव बनाया, जो अक्सर पार्टी सीमाओं से भी आगे जाता था। उनके निधन से केरल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति ने एक अनुभवी और वैचारिक रूप से मजबूत नेता को खो दिया है।