एफसीआरए संशोधन विधेयक पर संसद में घमासान (सोर्स- सोशल मीडिया)
FCRA Amendment Bill 2026: विदेशी चंदा (विनियमन) संशोधन बिल का लेकर दो दिन से संसद में बवाल मचा हुआ है। विपक्ष इस बिल के जरिए सरकार द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) पर नियंत्रण करने का आरोप लगा रहा है। सरकार का दावा है कि संशोधन के पीछे उसका मकसद उन देश विरोधी ताकतों की आर्थिक कमर तोड़ना है, जो चंदे के नाम पर करोड़ों रुपये हासिल करती हैं।
कुल मिलाकर सत्ता और विपक्ष इस बिल को लेकर आमने-सामने हैं, लेकिन इस विदेशी सेवा चंदे के आंकड़ों पर नजर डालें तो वास्तव में यह हजारों करोड़ का ऐसा खेल है जिसकी सच्चाई जानने में ही सरकार को 1 से 2 तक लग जाते हैं। जबकि 2023 में विदेशी अंशदान विनियमन कानून में किए गए कुछ सख्त प्रावधानों के बाद यह चंदा सिर्फ उन्हीं संस्थाओं को प्राप्त हो सकता है, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से संबद्ध हैं। बावजूद इन्हें प्राप्त होने वाली राशि का आसानी से पता नहीं लग रहा है।
2023 तक के आंकड़ों की बात करें तो इससे पहले के पांच साल में देश में 20,000 से ज्यादा संस्थाओं को करीब 88,000 करोड़ का विदेश चंदा प्राप्त हुआ था। यानी यह मामला 5-10 करोड़ नहीं हजारों करोड़ का है। जिस पर तमाम बड़ी संस्थाओं के साथ ही लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों की नजर है।
1- लोक सेवकों प्राप्त नहीं कर सकेंगे
संसद के बजट सत्र में पेश संशोधनों के तहत अब लोक सेवकों को विदेशी फंडिंग प्राप्त करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसमें विधायक, सांसद और सरकारी कर्मचारी को शामिल करना ही विवाद की वजह है।
आपत्ति: विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें लोक सेवक की परिभाषा इतनी व्यापक है कि यह स्वतंत्र शोधकर्ताओं या सलाहकारों को भी प्रभावित कर सकती है।
2- फंड ट्रांसफर पर रोक
विधेयक के तहत अब विदेशी फंड हासिल करने वाली कोई भी संस्था फंड को किसी दूसरी संस्था या एनजीओ को ट्रांसफर नहीं कर सकती, भले ही दूसरी संस्था के पास भी एफसीआरए रजिस्ट्रेशन हो।
आपत्ति: देश में कई बड़े एनजीओ छोटे और जमीनी स्तर के संगठनों को फंड देकर काम करवाते थे। इस नियम से छोटे संगठनों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और ग्रामीण इलाकों में चल रहे प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए हैं।
3- प्रशासनिक खर्च की सीमा
विदेशी फंड का उपयोग प्रशासनिक कार्यों जैसे ऑफिस का किराया, सैलरी के लिए करने की सीमा 50% से घटाकर 20% कर दी गई है।
आपत्ति: फील्ड वर्क और रिसर्च में लगे स्टाफ की सैलरी भी इसी खर्च में आती है। सीमा घटने से वे योग्य पेशेवरों को नौकरी पर नहीं रख पाएंगे और प्रोजेक्ट को लागू करना मुश्किल होगा।
4- आधार की अनिवार्यता
एफसीआरए रजिस्ट्रेशन या नवीनीकरण के लिए संस्था के सभी पदाधिकारियों, निदेशकों और प्रमुख व्यक्तियों के लिए आधार कार्ड देना अनिवार्य है। विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट की कॉपी जरूरी है।
आपत्ति: इसे निजता के अधिकार और सुप्रीम कोर्ट के आधार संबंधी पुराने फैसलों के खिलाफ बताया जा रहा है।
5- केवल दिल्ली में खाता
अब सभी एनजीओ को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए केवल भारतीय स्टेट बैंक दिल्ली की मुख्य शाखा में ही एफसीआरए अकाउंट खोलना होगा।
आपत्ति: पूर्वोत्तर या सुदूर दक्षिण में काम करने वाले एनजीओ के लिए दिल्ली की एक ही शाखा में बैंकिंग करना मुश्किलें पैदा करने वाला होगा।
6- 1 साल का निलंबन
सरकार अब किसी भी संस्था का एफसीआरए सर्टिफिकेट 360 दिनों के लिए निलंबित कर सकती है, जबकि पहले यह अवधि 180 दिन थी।
आपत्ति: आलोचकों का कहना है कि एक साल तक फंडिंग रुकने से उस एनजीओ का काम पूरी तरह ठप हो सकता है। इससे वहां काम करने वाले लोगों का रोजगार और प्रोजेक्ट खत्म हो सकते हैं।
वर्ष फंडिंग
| वर्ष | राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| 2017-18 | 16,940 |
| 2018-19 | 16,490 |
| 2019-20 | 16,306.04 |
| 2020-21 | 17,058.64 |
| 2021-22 | 22,085.10 |
| वर्ष | राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| 2016-17 | 5,869 |
| 2017-18 | 6,199 |
| 2018-19 | 6,907 |
देश में सबसे ज्यादा फंड पाने वाले शहरों में दिल्ली को आम तौर पर सबसे ज्यादा विदेशी फंड मिलता है। जिसके बाद तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र का नंबर आता है। हालांकि, किस शहर में कितने एनजीओ की कितनी संख्या है और उन्हें कितनी विदेशी फंडिंग मिली, यह स्पष्ट नहीं है।
| वर्ष | एनजीओ की संख्या |
|---|---|
| 2019-20 | 22,000 |
| 2020-21 | 14,497 |
| 2021-22 | 16,000 |
| 2022-23 | 15,000 |
1,827 एनजीओ के लाइसेंस 2018-2023 रद्द किए गए। 7,500 से ज्यादा नवीनीकरण आवेदन 2023-24 में अस्वीकार किए गए। इसके अलावा 20,693 पंजीकरण 2017 से अब रद्द किए जा चुके हैं।