प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने आजादी को बनाया खास, रेत पर उकेरी ऑपरेशन सिंदूर की कहानी

Renowned sand artist Sudarshan Patnaik: देश की 50वें साल की आजादी को मशहूर आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने खास बनाया। रेत पर ऑपरेशन सिंदूर की कहानी को, देश की शौर्यता को कलात्मकता के साथ दिखाया है।
operation sindoor beautiful sand art done by sudarshan patnayak
रेत पर बनीं ऑपरेशन सिंदूर की बेहतरीन झलक (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Famous sand artist Sudarshan Patnaik made Independence Day special: देश के 50वें साल की आजादी को मशहूर आर्टिस्ट ने खास बना डाला। उन्होंने  स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ओडिशा के पुरी तट पर अनूठी विज्ञान-आधारित रेत की मूर्तियों की एक श्रृंखला बनाई है। प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक एक पद्मश्री पुरस्कार विजेता हैं।

रेत पर इन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की पूरी कहानी को बहुत ही उम्दा कलाकृत्ति के साथ दर्शाया है।  इस कलाकृति में राफेल लड़ाकू विमानों को दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते हुए कलात्मक रूप से दिखाया गया है, जिसे लाल बिंदी और भारत के नक्शे के माध्यम से पटनायक ने क्या खूब बनाया है।

देश की आजादी के मौके पर कला के माध्यम से भारत की ताकत को प्रदर्शित करने की चाह

पटनायक ने अपनी कलाकृति के बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर, मैं अपनी कला के माध्यम से भारत की ताकत, नवाचार और देशभक्ति को प्रदर्शित करना चाहता था। इस कलाकृति में हमने दिखाया कि भारतीय लड़ाकू विमान राफेल किस तरह से दुश्‍मन के ठिकानों को तबाह कर रहा है। इसके साथ में लाल रंग की बिंदी भारत के मध्‍य में है। इसके साथ में 'भारत माता की जय' का संदेश दिया गया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' हमारे देश की रणनीतिक प्रतिभा और साहस का प्रतीक है, और मुझे उम्मीद है कि यह मूर्ति हर भारतीय को गौरवान्वित करेगी।

पहले भी बना चुके पुरी के समुद्र तट पर भगवान जगन्नाथ की रेत से आकर्षक मूर्ति

इससे पहले सुदर्शन पटनायक ने पुरी के समुद्र तट पर भगवान जगन्नाथ की रेत से एक आकर्षक मूर्ति बनाई थी, जो भक्ति, सांस्कृतिक गौरव और देशभक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत करती थी। यह 6 फीट ऊंची रेत मूर्ति न सिर्फ कला का उत्कृष्ट नमूना थी, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी समेटे हुए थी। पटनायक की बनाई यह रेत की मूर्ति लोगों के बीच बहुत पसंद की गई।

इस खास कलाकृति में सुदर्शन पटनायक ने महाप्रभु जगन्नाथ को 'पद्मवेश', यानी कमल की पोशाक में खूबसूरती से चित्रित किया था। मूर्ति को राखी के रूपांकन में डिजाइन किया गया था, जो रक्षाबंधन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता था।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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