हम हैं अमित शाह के भतीजे…कहकर ऐंठ लिए करोड़ों, आरोपी शख्स को हाईकोर्ट से लगा झटका
Delhi High Court: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भतीजा अजय शाह बनकर कारोबारी से करोड़ों रुपए ठगने वाले शख्स को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार किया।
- Written By: सौरभ शर्मा
दिल्ली हाईकोर्ट कॉन्सेप्ट फोटो
Delhi High Court Amit Shah Nephew Fraud Person: दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भतीजा बताकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी अजय नैय्यर को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला साल 2021 का है, जब आरोपी ने खुद को ‘अजय शाह’ बताकर एक व्यवसायी से 3.9 करोड़ रुपये की ठगी की थी। आरोपी ने शिकायतकर्ता को राष्ट्रपति भवन संपदा के नवीनीकरण से जुड़े 90 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके का झांसा दिया था।
व्यवसायी की शिकायत के अनुसार, अजय नैय्यर और उसके साथियों ने पहले ठेका दिलाने का दावा किया और बाद में बताया कि टेंडर की राशि 90 करोड़ से बढ़कर 127 करोड़ रुपये हो गई है। इसी दौरान व्यवसायी को शक हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया। दिसंबर 2021 में दर्ज FIR के बाद आरोपी को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने सुरक्षा के तौर पर जाली चेक भी दिया था, जिस पर अदालत अब गंभीरता से विचार कर रही है।
जमानत पर अदालत का सख्त रुख
अजय नैय्यर की ओर से जमानत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया गया था, जिसमें सह-आरोपी राज कुमार नैय्यर को जमानत दी गई थी। शीर्ष अदालत के जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने यह कहते हुए राहत दी थी कि अपराध मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई योग्य है और अधिकतम सजा सात साल तक की हो सकती है। साथ ही सह-आरोपी पहले ही चार साल जेल में बिता चुका था।
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लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अलग रुख अपनाया। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और ट्रायल कोर्ट आईपीसी की धारा 467 (जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग) और 120बी (आपराधिक साजिश) जैसे प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रहा है। इन धाराओं में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
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ठगी के मामले में अगला कदम
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता से ठगे गए करोड़ों रुपये के मामले में आरोपी द्वारा दिया गया चेक फर्जी साबित हुआ है। यही वजह है कि कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। अब मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा है और आरोपों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की सुनवाई होगी।
