पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पत्नी AIIMS के इमरजेंसी में भर्ती, रसोई में गिरने से लगी चोट
Jagdeep Dhankhar Wife in AIIMS: एक अधिकारी ने बताया कि जगदीप धनखड़ की पत्नी रसोई में गिर गईं थीं, जसकी वजह से उनकी पीठ में चोट लग गई। डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पत्नी AIIMS के इमरजेंसी में भर्ती, रसोई में गिरने से लगी चोट
Jagdeep Dhankhar News: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की पत्नी सुदेश को गुरुवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया, यह जानकारी अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। अधिकारियों ने बताया कि पूर्व उपराष्ट्रपति की पत्नी रसोई में गिरने के कारण पीठ में चोट लग गई थी, जिसके बाद उन्हें एम्स के इमरजेंसी विभाग में लाया गया। उन्होंने बताया कि 70 वर्षीय सुदेश जगदीप धनखड़ के साथ एक वाहन में थीं। यह जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से मिली है।
एक अधिकारी ने बताया कि जगदीप धनखड़ की पत्नी रसोई में गिर गई थीं, जिसके कारण उनकी पीठ में चोट आई। डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं। बता दें कि जुलाई में पद छोड़ने के बाद से जगदीप धनखड़ अपने परिवार के साथ दिल्ली के छतरपुर स्थित एक फार्महाउस में रह रहे हैं।
कहां रह रहे हैं पूर्व उपराष्ट्रपति?
जुलाई में उपराष्ट्रपति का पद छोड़ने के बाद, जगदीप धनखड़ छतरपुर स्थित एक फार्महाउस में रह रहे हैं। पिछले कई महीनों से वह लगातार चर्चा में बने हुए हैं। 21 जुलाई को धनखड़ ने कथित तौर पर अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था, जिसके बाद इस फैसले को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ। कुछ समय बाद, सूत्रों ने इस इस्तीफे को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से जोड़ दिया था। हालांकि, जो लेटर धनखड़ ने भेजा था, उसमें आधिकारिक रूप से खराब सेहत की वजह बताई गई थी।
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विपक्ष ने धनखड़ के इस्तीफे को एक बड़ा मुद्दा बना दिया था और केंद्र सरकार से उन्हें एक उचित फेयरवेल देने की अपील की थी। साथ ही, उनके लंबे समय से चुप्पी साधे रहने पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद, सितंबर में हुए उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन ने जीत हासिल की थी, और खुद जगदीप धनखड़ ने बाद में उनसे मुलाकात भी की थी।
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बता दें कि भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल आमतौर पर शपथग्रहण के बाद से पांच साल की अवधि का होता है। हालांकि, इस दौरान वे कभी भी राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए अपना पद छोड़ सकते हैं। जब उपराष्ट्रपति का पद उनके इस्तीफे, मृत्यु या किसी अन्य कारण से खाली होता है तो इस पद को भरने के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराया जाना जरूरी होता है। इस चुनाव में जो भी उपराष्ट्रपति चुना जाता, वह पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए पद संभालता है।
