

El Nino Extreme Heat Warning: जलवायु वैज्ञानिकों के नए आकलन के अनुसार प्रशांत महासागर में एक अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है। यह असाधारण अल नीनो अगले छह महीनों में दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी के कारण 4.5 लाख से अधिक लोगों की जान ले सकता है।
शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब द्वारा जारी रिपोर्ट में इस संभावित मानवीय त्रासदी की चेतावनी दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस भयंकर अल नीनो का प्रभाव भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा।
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस बदलाव का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के तापमान, बारिश और हवाओं के पैटर्न पर पड़ता है।
मौजूदा अल नीनो की तीव्रता को लेकर वैज्ञानिकों ने विशेष चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में तापमान पहले के रिकॉर्ड स्तर से ऊपर पहुंच चुका है। यह घटना ऐसे समय में हो रही है जब मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग के कारण पहले से ही दुनिया का तापमान बढ़ा हुआ है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के आकलन के अनुसार अगले छह महीनों में अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में करीब 66800 अतिरिक्त गर्मी से मौतें हो सकती हैं। इनमें नाइजीरिया में करीब 31400 और सूडान में लगभग 17600 मौतों का अनुमान है।
इंडोनेशिया में करीब 19300, ब्राजील में 13300 और भारत में लगभग 15800 अतिरिक्त गर्मी से मौतों का अनुमान लगाया गया है। भारत में दिसंबर से फरवरी के बीच इस अनुमानित मौतों का बड़ा हिस्सा होने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशिया के फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में भी करीब 19400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। अमेरिका में यह संख्या लगभग 3500 बताई गई है। ये आंकड़े केवल अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौतों का अनुमान हैं, जबकि सूखे, बाढ़ और जंगलों की आग से होने वाली संभावित मौतें इसमें शामिल नहीं हैं।
अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन के अनुसार, यह अनुमान सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक के तापमान पूर्वानुमानों पर आधारित है। अध्ययन में 24378 क्षेत्रों में तापमान और अतिरिक्त गर्मी से होने वाली मौतों के संबंध का विश्लेषण किया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह आंकड़ा निश्चित भविष्यवाणी नहीं, बल्कि संभावित जोखिम का अनुमान है। बेहतर हीट अलर्ट सिस्टम, कूलिंग सेंटर, अस्पतालों में अतिरिक्त व्यवस्था और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा जैसे कदम उठाकर संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।