बेंगलुरु से हैदराबाद तक I-PAC पर छापेमारी, चुनाव से पहले ममता के ‘चाणक्य’ पर गिरी गाज, कोयला तस्करी से कनेक्शन
Coal Smuggling Case: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ED ने I-PAC के बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। कोयला तस्करी मामले में डायरेक्टर ऋषिकांत सिंह के आवास पर भी जांच जारी है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
प्रतीकात्कम तस्वीर-(Image- Social Media)
ED Raid on I-PAC: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर I-PAC के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में की जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह छापेमारी कथित कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। I-PAC पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति और प्रबंधन का काम संभाल रही है।
I-PAC के डायरेक्टर ऋषिकांत सिंह के घर छापा
ईडी सूत्रों के अनुसार, बेंगलुरु में I-PAC के डायरेक्टर ऋषिकांत सिंह के आवास पर भी छापा मारा गया। हालांकि अब तक छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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जनवरी में हुई थी छापेमारी
इससे पहले जनवरी 2026 में कोलकाता स्थित I-PAC ऑफिस पर भी ईडी ने छापा मारा था। उस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं और इस कार्रवाई को लेकर काफी राजनीतिक विवाद हुआ था।
I-PAC एक चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था है, जिसकी स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी। यह कंपनी विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनाव प्रबंधन और कैंपेन रणनीति तैयार करती है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के अभियान का संचालन प्रतीक जैन देख रहे हैं।
कौन हैं प्रतीक जैन?
I-PAC के को-फाउंडर प्रतीक जैन हैं। यह कंपनी सॉल्ट लेक स्थित एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जिसकी नींव 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने रखी थी। प्रशांत किशोर देश के प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकारों में गिने जाते रहे हैं। बाद में उन्होंने जन सुराज पार्टी का गठन किया और बिहार में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गए।
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प्रतीक जैन की उम्र लगभग 34 साल बताई जाती है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से अपनी पढ़ाई पूरी की है। साल 2021 में प्रशांत किशोर ने औपचारिक रूप से I-PAC से खुद को अलग कर लिया था, जिसके बाद ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के डायरेक्टर बने। 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से I-PAC तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ लगातार काम कर रही है। 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की बड़ी जीत और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का बड़ा श्रेय I-PAC को दिया जाता है।
