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बंगाल चुनाव के बीच ED का बड़ा एक्शन…करोड़ों का कोयला घोटाला और लाला पैड सिस्टम को किया EXPOSE

Coal Scam West Bengal: ED ने बंगाल में अवैध कोयला खनन मामले में 159 करोड़ की संपत्ति कुर्क की। जानें क्या है 'लाला पैड' सिस्टम और कैसे 10 रुपये के नोट से चलता था तस्करी का खेल।

  • Written By: सजल रघुवंशी
Updated On: Apr 15, 2026 | 06:15 PM

प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- एआई जनरेटेड)

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ED Action In Bengal: पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई ईस्टर्न कोफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज वाले इलाके में हो रहे अवैध कोयला खनन और चोरी के खिलाफ की गई है। बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है।

जांच में पता चला कि कंपनी बड़े पैमाने में हेरा-फेरी कर रही थी और अवध खनन का काम एक ऐसे सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा था जिसको अनूप माझी नाम का व्यक्ति लीड कर रहा था। इसके अलावा बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियों ने मुनाफा कामने के लिए अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदा, जिससे उन्होंने अपराध से प्राप्त आय को छिपाने और उसे वैध आय के रूप में दिखाने में मदद की।

काले धन को वैध बनाने का खेल

जांच में पाया गया कि चल वित्तीय साधनों में किए गए निवेश इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड और वैकल्पिक निवेश फंड जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर अवैध कमाई को व्यवस्थित रूप से वैध रूप दिया जा रहा था। गौरतलब है कि यह पूरा निवेश डायरेक्ट आरोपियों के नाम पर न होकर लाभार्थी संस्थाओं के जरिए किए गए थे, जिनमें दो कंपनियों का नाम मुख्य रूप से सामने आ रहा है। पहला श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और दूसरा श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं।

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श्याम ग्रुप की अहम भूमिका

जानकारी के लिए बता दें कि श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड दोनों ही कंपनियां श्याम ग्रुप का हिस्सा हैं, जिसका संचालन संजय अग्रवाल और बृज भूषण अग्रवाल के हाथों में बताया गया है।

जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 482 करोड़

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा ढांचा केवल निवेश का साधारण मामला नहीं था बल्कि काले धन को छिपाने और उसके स्रोत को जटिल बनाने की एक सोची-समझी रणनीति थी। हालिया कार्रवाई में संपत्तियों की अटैचमेंट के बाद इस मामले में जब्त कुल संपत्ति का मूल्य बढ़कर 482.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जो इस पूरे नेटवर्क के विशाल पैमाने को दर्शाता है।

लाला पैड सिस्टम का इस्तेमाल

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट अवैध खुदाई और बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में सक्रिय रूप से शामिल था। चोरी किए गए कोयले को पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसमें स्थानीय प्रशासनिक तत्वों की मिलीभगत भी सामने आई है। इस नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा था ‘लाला पैड’ नामक अवैध परिवहन चालान प्रणाली।

क्या है लाला पैड सिस्टम?

दरअसल, लाला पैड सिस्टम एक नकली टैक्स इनवॉइस के रूप में इस्तेमाल होती थी, जिसे ऐसी फर्जी संस्थाओं के नाम पर जारी किया जाता था, जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं होता था। इस फर्जी दस्तावेज के सहारे अवैध कोयले को वैध दिखाकर ट्रकों के जरिए आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लंबे समय तक गुमराह किया और अवैध कारोबार को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद की।

लेन-देन का जटिल तरीका

इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली केवल अवैध खनन और परिवहन तक सीमित नहीं थी बल्कि धन के लेन-देन को भी बेहद जटिल और गुप्त तरीके से अंजाम दिया जाता था। ट्रांसपोर्टरों को फर्जी चालान के साथ 10 या 20 रुपये का नोट दिया जाता था, जिसे वाहन की नंबर प्लेट के पास रखकर फोटो खींची जाती थी। यह फोटो व्हाट्सऐप के जरिए संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी जिससे ट्रकों को बिना रोक-टोक गुजरने की अनुमति मिल जाती थी।

यह भी पढ़ें: बिहार सरकार में हुआ विभागों का बंटवारा, JDU के हाथ से निकले कई अहम मंत्रालय; यहां देखें पूरी लिस्ट

हवाला के जरिए पैसा ट्रांसफर

इसके अलावा, अवैध कमाई को ट्रांसफर करने के लिए एक संगठित हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें नोट के सीरियल नंबर को एक गुप्त पहचानकर्ता के रूप में उपयोग किया जाता था, जिसे भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच साझा किया जाता था। जब दोनों पक्षों के पास मौजूद नोट का मिलान हो जाता, तब बिना किसी दस्तावेजी प्रक्रिया के नकद राशि का हस्तांतरण कर दिया जाता था। इस तरह यह पूरा नेटवर्क बिना कोई ठोस सबूत छोड़े बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन को अंजाम देता रहा।

Ed action in bengal exposed one of the biggest coal scam

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Published On: Apr 15, 2026 | 06:15 PM

Topics:  

  • Assembly Election 2026
  • ED
  • West Bengal
  • West Bengal Assembly Election

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