Explainer: E100 फ्यूल को मिली मंजूरी, क्या वाकई पेट्रोल को रिप्लेस कर पाएगा एथेनॉल? ये हैं 5 बड़ी चुनौतियां
E100 Fuel vs Petrol: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E100 फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाले नियमों पर उन्होंने 12 जून को साइन किए थे। अब देश में नया फ्रेमवर्क लागू हो गया है।
- Written By: मनोज आर्या
क्या पेट्रोल की जगह लेगा एथेनॉल, (AI जेनरेटेड इमेज)
5 Major Challenges Facing E100 Fuel: मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच बढ़ती क्रूड ऑयल की कीमतें पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच पेट्रोल के वैकल्पिक और क्लीन फ्यूल की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने E100 फ्यूल (100% एथेनॉल) के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है, जिससे 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों का रास्ता साफ हो गया है। यह घोषणा भारत के बायोफ्यूल मिशन में एक अहम पड़ाव है और देश में मोबिलिटी के भविष्य को नया आकार दे सकती है।
महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने 12 जून को E100 फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी देने वाले नियमों पर साइन किए थे। अब जब नया फ्रेमवर्क लागू हो गया है, तो कार बनाने वाली कंपनियां, फ्यूल रिटेलर और टेस्टिंग एजेंसियां एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों के कमर्शियल रोलआउट की तैयारी शुरू कर सकती हैं।
E20 की सफलता के बाद सरकार का कदम
यह कदम भारत के E20 (20% एथेनॉल) प्रोग्राम की सफलता पर आधारित है, जिसने अप्रैल 2026 तक तय समय से पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल कर ली थी। सरकार के अनुसार, एथेनॉल पहल ने पहले ही कच्चे तेल के इम्पोर्ट में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बचाने में मदद की है, जबकि किसानों के लिए लगभग 80,000 करोड़ रुपये की आय पैदा की है। इस घोषणा की सबसे बड़ी खासियतों में से एक E100-कम्पैटिबल मारुति सुजुकी वैगनआर का लॉन्चिंग था। मारुति सुजुकी वैगनआर भारत की पहली मास-मार्केट कारों में से एक बन गई है जो 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने में सक्षम है।
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#WATCH | Nagpur, Maharashtra: Union Minister Nitin Gadkari says, “Last night at 8 PM, I signed the file, finalising the regulations to legally authorise the use of 100% ethanol. I am delighted to share that I, along with Hardeep Singh Puri, had the opportunity to launch the 100%… pic.twitter.com/BDIyTZGZF4 — ANI (@ANI) June 13, 2026
नितिन गडकरी ने कहा कि उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर मारुति सुजुकी वैगनआर का एथेनॉल-कम्पैटिबल वर्जन लॉन्च किया। भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक के तौर पर, मारुति सुजुकी वैगनआर भारतीय खरीदारों के बीच फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी को पॉपुलर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
100% एथेनॉल के सामने कई चुनौतियां
सरकार की ओर से 100 प्रतिशत एथेनॉल की मंजूरी तो मिल चुकी है, लेकिन इस बदलाव को धरातल पर उतारना काफी चुनौतीपूर्ण है। सबसे बड़ी बाधा वर्तमान पेट्रोल पंपों में तकनीकी बदलाव करने की है, क्योंकि एथेनॉल की प्रकृति पेट्रोल से अलग होती है जिसके लिए विशेष स्टोरेज और पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, मौजूदा ऑटोमोबाइल इंजन 100% एथेनॉल पर चलने में सक्षम नहीं हैं, जिसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों का व्यापक स्तर पर आना जरूरी है। सप्लाई चेन और इथेनॉल के निरंतर उत्पादन को बनाए रखना भी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है, जिसे हल किए बिना इस योजना का व्यापक लाभ मिलना कठिन है। आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए उन 5 बड़ी चुनौतियों को विस्तार से समझते हैं।
1. पेट्रोल पंपों में तकनीकी बदलाव
भारत जैसे देश में पेट्रोल की जगह 100 प्रतिशत एथेनॉल लागू करने के नियम में सबसे बड़ी चुनौती है मौजूदा पेट्रोल पंप की व्यवस्था। क्योंकि एथेनॉल की प्रकृति पेट्रोल से अलग होती है जिसके लिए विशेष स्टोरेज और पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। अगर पेट्रोल की जगह 100 प्रतिशत एथेनॉल को लागू करने क लिए इसमें बहुत बदलाव करने की जरूरती होगी।
2. मौजूदा वाहन 100% एथेनॉल के लिए सक्षम नहीं
देश में जो मौजूदा वाहन हैं, वो 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि, सरकार इस बदलाव में काफी तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में मारुति सुजुकी ने 100 प्रतिशत फ्लेक्स फ्यूल पर चलने वाली मारुति सुजुकी वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल (Wagon R Flex Fuel) लॉन्च की है। यह भारत की पहली मास-मार्केट फ्लेक्स-ईंधन पैसेंजर कार है। यह कार 20% (E20) से लेकर 85% (E85) तक इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने में सक्षम है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹7 से ₹8.5 लाख है।
3. सप्लाई चेन और उत्पादन एक बड़ी चुनौती
भारत सरकार की ओर से लिए गए अहम फैसले के तहत 100 प्रतिशत एथेनॉल बेस्ड फ्यूल को हरी झंड़ी मिल गई है। हालांकि, इस जमीनी स्तर पर लागू होने में अभी काफी समय लग सकता है। इस व्यवस्था लागू करने के लिए सप्लाई चेन और एथेनॉल का उत्पादन को सबसे बड़ी समस्या के रूप में देखा जा रहा है। भारत की कुल एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर (या 20 बिलियन लीटर) तक पहुंच गई है। हालांकि, हर साल आवश्यकता के अनुसार उत्पादन OMCs (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) की मांग पर निर्भर करता है, जबकि देश की कुल मांग 20% ब्लेंडिंग (E20) के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर है। अगर 100 प्रतिशत एथेनॉल को देश में लागू किया जाता है, तो इस स्थिति में भारी मात्रा में एथेनॉल उत्पादन की जरूरत होगी।
4. वाहनों के इंजन को नुकसान
एथेनॉल में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जो कोरोसिव होता है। इसलिए, E20 या उससे ज्यादा एथेनॉल ब्लेंड इंटरनल कम्बशन इंजन के पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह खास तौर पर पुराने इंजन और टू-व्हीलर में इस्तेमाल होने वाले इंजन के लिए सच है, जहां इंजन ब्लॉक के लिए हाई-ग्रेड एल्यूमीनियम या स्टील कास्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
5. पेट्रोल के मुकाबले कम माइलेज
कई ग्राहकों ने E10 से E20 शिफ्ट के बाद माइलेज में कमी की शिकायत की थी। यह कमी 5-12 प्रतिशत के बीच हो सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कार कब बनी थी। हालांकि, पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कहा है कि माइलेज में यह कमी मामूली होगी।
पेट्रोल और एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू क्या होती है?
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क्या E100 सभी गाड़ियों के लिए उपयुक्त
बता दें कि E100 फ्यूल अभी मौजूद पेट्रोल गाड़ियों के लिए सक्षम नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि E100 का इस्तेमाल सिर्फ खास तौर पर विकसित फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में ही किया जाएगा। E20 फ्यूल के लिए डिजाइन की गई रेगुलर कारें बिना किसी बदलाव के पहले की तरह चलती रहेंगी।
