पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात पर CJI चंद्रचूड़ ने पहली बार खुलकर की बात, गणेश पूजा के दौरान उठे थे सवाल
गणेश पूजा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात पर बात करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी मुलाकातें होती रहती हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुलाकात करते हैं, इसका मतलब ये नहीं की कोई डील हो गई।
- Written By: Saurabh Pal
नरेंद्र मोदी और CJI डीवाई चंद्रचूड़ (फोटो-सोर्स सोशल मीडिया)
मुंबईः सुप्रीम कोर्ट के मुख्यन्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (CJI DY chandchud) की बीते अगस्त महीने में गणेश पूजा के अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक तस्वीर आई थी। जिसकी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी। सोशल मीडिया एक्स पर इस तस्वीर को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे थे।
ये तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने एक्स हैंडल पर शेयर की थी, लेकिन एक बार फिर से सीजेआई और प्रधानमंत्री की मुलाकात चर्चा में आ गई है। दरअसल सीजेआई ने मुंबई में एक कार्यक्रम दौरान इस मुलाकात को लेकर खुलकर बात की है।
CJI चंद्रचूड़ और पीएम मोदी की तस्वीर पर उद्धव ने की थी टिप्पणी
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PM मोदी के CJI के घर जाने के बाद शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा था कि CJI चंद्रचूड़ महाराष्ट्र मामले (उद्धव और शिंदे गुट के बीच शिवसेना पार्टी का नाम-सिंबल विवाद) की सुनवाई कर रहे हैं। मोदी के साथ उनके दोस्ताना रिश्ते देखकर हमें शंका है कि क्या हमें न्याय मिलेगा।
अब सीजेआई ने पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर कहा कि सरकार के मुखिया से मुलाकात का ये मतलब नहीं की कोई डील हो गई है। जब भी सुप्रीट कोर्ट या हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश किसी भी मुख्यमंत्री या देश के प्रधानमंत्री से मिलते हैं, तो इन मुलाकातों में राजनीतिक परिपक्वता होती है। उन्होंने कहा कि हमें राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलना होता है। क्योंकि राज्य सरकारें ज्यूडिशियरी के लिए बजट आवंटित करती हैं। सीएम या फिर पीएम से मुलाकात के दौरान किसी भी न्यायलय में लंबित केस पर बातचीत नहीं होती है। सीएम या मुख्यन्यायाधीश त्योहारों या शोक में एक-दूसरे से मिलते हैं। यह हमारे काम पर कोई असर नहीं डालता।
जजों की छुट्टी पर क्या बोले चंद्रचूड़
भारत में अक्सर जजों की छुट्टियों पर भी सवाल उठते रहें हैं। इसको लेकर CJI ने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि जजों पर बहुत ज्यादा काम का बोझ रहता है। उन्हें सोचने- समझने के लिए समय चाहिए होता है, क्योंकि जजों के फैसलों से समाज का भविष्य तय होता है। उन्होंने बताया कि मेरी सुबह 3:30 बजे होती है और मैं सुबह 6 बजे काम करना शुरू कर देता हूं। उन्होंने काम के बोझ का उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट एक साल में 181 मामलों में फैसला देता है, जबकि भारत में इतने केस तो एक दिन में निपटाए जाते हैं।
कोलेजियम सिस्टम पर खुलकर बोले सीजेआई
उन्होंने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम एक यूनियन सिस्टम है, जहां जिम्मेदारियां अलग-अलग लेवल पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ज्यूडिशियरी में बंटी हैं। इसमें आम सहमति बनती है, लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब सहमति नहीं बन पाती। ऐसे में ज्यूडिशियरी के अलग अलग लेवल पर और सरकारों के अलग-अलग लेवल पर मेच्योरिटी के साथ निपटाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की हर संस्था में बेहतरी का स्कोप है।
