गधे भी आपको बना सकते हैं करोड़पति, सरकार दे रही 50 लाख की मदद, जानें इस बिजनेस का पूरा ब्लूप्रिंट
Donkey Farming In India: भारत सरकार राष्ट्रीय गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है, जिसका उद्देश्य विलुप्त होती स्वदेशी नस्लों को बचाना है। जानें क्या है यह पूरी स्कीम।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो सोर्स- AI
Government Subsidy Schemes Animal Husbandry: खेतों में कड़ी मेहनत और बोझ ढोने के लिए पहचाने जाने वाले गधे अब आपकी किस्मत बदलने का जरिया बन सकते हैं। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन भारत सरकार अब गधा पालन को एक मुनाफे वाले बिजनेस के तौर पर देख रही है। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के जरिए सरकार इस क्षेत्र में कदम रखने वाले उद्यमियों और किसानों को 50 लाख रुपये तक की भारी-भरकम आर्थिक मदद दे रही है।
यह सिर्फ एक सब्सिडी नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और विलुप्त होती पशु नस्लों को बचाने की एक बड़ी योजना है। आधुनिक दौर में जहां तकनीक हावी है, वहां पशुपालन के इस पारंपरिक क्षेत्र को नए व्यावसायिक नजरिए से देखना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।
किसे और कैसे मिलेगा यह फायदा?
भारत सरकार का मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय इस योजना को आगे बढ़ा रहा है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, गधों, घोड़ों और ऊंटों जैसे जानवरों के ब्रीडिंग फार्म स्थापित करने के लिए कुल प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत तक का पूंजीगत अनुदान दिया जाता है।
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यह अमाउंट अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकता है, जो किसी भी स्टार्टअप के लिए एक बड़ी शुरुआती मदद होगी। खास बात यह है कि इस योजना का फायदा न केवल व्यक्ति विशेष उठा सकता है, बल्कि किसान उत्पादक संगठन (FPOs), स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियां भी इसके लिए अप्लाई कर सकती हैं।
यह अनुदान दो चरणों में जारी किया जाता है:
पहली किस्त बैंक लोन की मंजूरी के समय और दूसरी किस्त फार्म का निर्माण पूरा होने और संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद सीधे खाते में भेजी जाती है।
आखिर क्यों विलुप्त हो रहे हैं गधे? 60 फीसदी की गिरावट ने बढ़ाई चिंता
कभी गांवों में परिवहन और निर्माण कार्यों का मुख्य हिस्सा रहे गधों की संख्या भारत में चिंताजनक रूप से कम हुई है। साल 2019 की 20वीं पशुगणना के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में गधों की संख्या घटकर महज 1.23 लाख रह गई है। साल 2012 की तुलना में इसमें करीब 60 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है, जो पशु विविधता के लिए एक बड़ा खतरा है। दरअसल, मशीनीकरण और आधुनिक लोडिंग वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल ने गधों की मांग को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे इनकी देखभाल और नस्ल सुधार की प्रक्रिया रुक गई।
सरकार का मानना है कि वित्तीय प्रोत्साहन देकर नए उद्यमियों को ब्रीडिंग फार्म स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिससे न केवल इनकी आबादी बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कम से कम 50 गधियां होना है जरूरी
अगर आप इस सब्सिडी का लाभ उठाकर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सरकार ने इसके लिए कुछ अनिवार्य शर्तें भी तय की हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आपके ब्रीडिंग यूनिट में कम से कम 50 मादा गधियां और 5 नर गधे होने चाहिए। इसके अलावा, यह योजना पूरी तरह से स्वदेशी नस्लों के संरक्षण पर केंद्रित है, इसलिए केवल देशी नस्लों के गधों के पालन पर ही यह आर्थिक मदद दी जाएगी।
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सरकार की मंशा स्थानीय पशु संपदा को सहेजना और किसानों की इनकम सोर्स में विविधता लाना है। आज के समय में गधी के दूध की बढ़ती मांग और इसके कॉस्मेटिक व औषधीय गुणों को देखते हुए यह क्षेत्र एक बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां गुजरात जैसे राज्यों में लोग गधी का दूध हजारों रुपये प्रति लीटर बेचकर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।
सरकार की अन्य बड़ी योजनाएं भी जान लीजिए
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अलावा भी भारत सरकार पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई अहम कार्यक्रम चला रही है। इन्हीं में से एक है ‘पशु किसान क्रेडिट कार्ड’, जिसके तहत छोटे पशुपालक बिना किसी गारंटी के 1.6 लाख रुपये तक का कर्ज रियायती ब्याज दरों पर ले सकते हैं। इसी तरह, ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के जरिए स्वदेशी गाय और भैंस की नस्लों को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
