कर्नाटक कैबिनेट में जातीय सर्वेक्षण पर चर्चा, डीके शिवकुमार बोले- लोगों की चिंता दूर कर रहे हम
कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने कर्नाटक सरकार को जातीय सर्वे में हुई त्रुटियों को दूर करने का निर्देश दिया है। इस मामले को लेकर आज कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में जातीय सर्वे में होने वाली त्रुटियों पर चर्चा की गई।
- Written By: Saurabh Pal
डीके शिवकुमार (फोटो-सोशल मीडिया)
बेंगलुरूः कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कैबिनेट मीटिंग के बाद जानकारी देते हुए पत्रकारों से कहा कि बैठक में जाति सर्वे दोबारा कराने को लेकर चर्चा हुई। इससे पहले सर्वे की रिपोर्ट में कई समुदायों ने डेटा गायब या गलत होने की चिंता जताई है। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, “हमने आज की कैबिनेट बैठक में इसी पर चर्चा की। कई लोगों ने कई सवाल उठाए हैं। इसलिए, हम आज की विशेष कैबिनेट बैठक में इसकी समीक्षा की।
गृहमंत्री ने कहा कि हमने इस पर भी चर्चा की कि क्या इसे सत्र में ले जाना चाहिए। पार्टी हाईकमान ने भी हमें इसकी समीक्षा करने के लिए कहा है। कुछ लोगों ने कहा है कि हमारे समुदाय को छोड़ दिया गया है। कुछ ने कहा है कि उनकी संख्या वास्तविक से कम है। इसलिए हमने आज इस पर फिर से चर्चा की।
पिछली जनगणना के डेटा पर थे कई सवाल
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इससे पहले, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जाति जनगणना को फिर से कराने के राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाने पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाजपा पहले की जाति जनगणना का विरोध कर रही थी, क्योंकि इसमें डेटा की शुद्धता के मुद्दे थे। हमने जनगणना को फिर से कराने की घोषणा की है, लेकिन भाजपा अभी भी इसका विरोध कर रही है। जाति जनगणना दोबारा कराने के फैसले की भाजपा द्वारा आलोचना किए जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा कि भाजपा ने पिछली जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया, अब विपक्ष क्या करे, जबकि हम लोगों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं?
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पिछली जनगणना पूरी तरह से बेकार नहींः डीके
डीके ने कहा कि हम पिछली जनगणना को खारिज नहीं कर रहे हैं, हम केवल कई समुदायों की चिंताओं को दूर करने के लिए पिछले सर्वेक्षण की कमियों को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या इस बार सर्वेक्षण वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा, उन्होंने कहा कि इसकी रूपरेखा पर कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। लंबानी, जैन, बेस्टा समुदायों सहित कई समुदायों ने मुझसे मुलाकात की थी और पिछले सर्वेक्षण पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि पिछला सर्वेक्षण भी घर-घर जाकर वैज्ञानिक तरीके से किया गया था, लेकिन कुछ लोग अपनी जाति का विवरण साझा करने में झिझक रहे थे। हमारे राष्ट्रीय नेताओं ने हमें कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं। एआईसीसी अध्यक्ष ने भी हमें कई सुझाव दिए हैं। मुख्यमंत्री कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा करेंगे और निर्णय लेंगे।
