दिल्ली में प्रदर्शन के लिए चुकाने होंगे लाखों रुपये, रामलीला मैदान से CBD ग्राउंड तक; देखें किसका कितना चार्ज

Protesting In Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन करना अब आसान नहीं होगा। जेब ढ़ीली होने के साथ-साथ अब संगठनों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कितना होगा खर्च और क्या है नियम, पूरी खबर पढ़े।
protesting in delhi has become costly
जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थलसोर्स-AI
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Highlights

  • दिल्ली में सीजेपी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

  • सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से रोक लगा दी है।

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से रोक के बाद दिल्ली के अन्य स्थलों पर प्रदर्शन करना महंगा हो जाएगा।

Protesting In Delhi Has Become Costly: देश में जब भी सरकार से सवाल करने और अपनी हक की मांग के लिए धरना देने की बात आती थी तो एक जगह सबकी जुबान पर आता था। वो नाम था जंतर-मंतर। दिल्ली का धरना प्रदर्शन स्थल अब बदल चुका है। कभी देश की राजनीति और सत्ता का ताज तय करने वाला जंतर-मंतर राजनीति की भेंट चढ़ गया है।

हाल के दिनों में सीजेपी, कांग्रेस समेत सभी विपक्ष दल एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जाकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा था। कई बार पुलिस से झड़प हुआ। गिरफ्तारी हुई और फिर फरमान आया राजधानी का धरना स्थल अब जंतर-मंतर नहीं बल्कि तीन नए विकल्पों के साथ रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड होगा। अपने हक की मांग और सत्ता से सवाल करने के लिए प्रदर्शन स्थल का बदलना क्या आंदोलन और प्रदर्शन को कमजोर करेगा?

इन स्थानों पर प्रदर्शन करना आंदोलनकारी संगठनों के लिए आसान नहीं होगा। बुकिंग का खर्च, सुरक्षा राशि, उपलब्धता और बुनियादी सुविधाएं उनके सामने नई चुनौतियां बन सकती हैं।

रामलीला मैदान

दिल्ली के रामलीला मैदान का प्रयोग पहले भी बड़े राजनीतिक आंदोलनों, रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए होता रहा है। लेकिन यहां प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आयोजकों को अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, रामलीला मैदान का एक दिन का बुकिंग शुल्क 50,000 रुपये है। इसके अलावा 55,000 रुपये की वापसी योग्य सुरक्षा राशि जमा करनी होती है। टैक्स समेत एक दिन की बुकिंग के लिए शुरुआती भुगतान करीब 1,21,080 रुपये बैठता है। हालांकि, सुरक्षा राशि नियमानुसार वापस मिलने पर वास्तविक खर्च इससे कम हो सकता है। मैदान की बुकिंग नगर निगम दिल्ली (MCD) के उद्यान विभाग के माध्यम से होती है और इसके लिए दिल्ली पुलिस की अनापत्ति जरूरी है।

कम बजट वाले संगठनों के लिए एक छोटा विकल्प भी बताया गया है। मैदान के सीमित हिस्से में करीब 150 लोगों तक की सभा या प्रदर्शन की सुविधा मुफ्त उपलब्ध हो सकती है, लेकिन इसकी अनुमति और शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग से करनी होगी।

CBD ग्राउंड

पूर्वी दिल्ली स्थित CBD ग्राउंड भी प्रदर्शन के लिए निर्धारित नए स्थलों में शामिल है। यह दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधीन आता है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र की बुकिंग पर एक दिन का खर्च लगभग 1.87 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें करीब 95,000 रुपये की सुरक्षा राशि शामिल है।

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बुराड़ी ग्राउंड

उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी ग्राउंड भी अब प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल है। इसका क्षेत्रफल करीब 57 एकड़ बताया गया है, जो बड़े आयोजनों के लिहाज से इसे उपयोगी बनाता है। रिपोर्टों में यहां का शुल्क लगभग 3,000 से 5,000 रुपये प्रति एकड़ बताया गया है। हालांकि, यह दर किस प्रकार की बुकिंग पर लागू होती है और विरोध-प्रदर्शन के लिए कुल कितना भुगतान करना होगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

बुराड़ी में भी दूसरे आयोजनों के कारण जगह की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल मैदान का आकार देखकर इसे सबसे सस्ता या सबसे सुविधाजनक विकल्प मानना सही नहीं होगा।

फिलहाल इन तीनों स्थानों को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया गया है। इन पर प्रदर्शन की अनुमति, आवेदन प्रक्रिया और अन्य शर्तों को लेकर संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में आंदोलनकारी संगठनों को बुकिंग से पहले संबंधित प्राधिकरण और दिल्ली पुलिस से नियमों की पुष्टि करनी होगी।

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जंतर-मंतर की खासियत

जंतर-मंतर की सबसे बड़ी खासियत संसद और केंद्रीय सत्ता के प्रमुख केंद्रों के नजदीक होना था। यही वजह रही कि राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वालों के लिए यह अहम स्थान बना रहा। इसके मुकाबले रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड की दूरी तथा बुकिंग प्रक्रिया प्रदर्शनकारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है। त्योहारों और दूसरे सार्वजनिक आयोजनों के दौरान उपलब्धता की समस्या भी सामने आ सकती है।

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