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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को किया तलब
कोर्ट के आदेश के अवमानना मामले में होनी थी सुनवाई
दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन को लेकर याचिका पर 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई
Supreme Court Summons Delhi Police: 10 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली में सीजेपी के प्रस्तावित आंदोलन के दरमियान सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के कथित उल्लंघन के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाबी हलफनामा और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले में कार्रवाई के लिए 13 अक्टूबर का दिन निर्धारित था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सुनवाई करने वाली बेंच के जज जस्टिस वी. मोहना की तबीयत खराब होने के कारण यह फैसला लिया गया। फिलहाल याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक टाल दी है।
देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सीजेपी और अन्य छात्र संगठनों की ओर से प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
इस दौरान सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसी शिकायत के आधार पर अदालत में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई।
इस मामले में दायर याचिकाओं पर 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी लेकिन सुनवाई करने वाली बेंच के जज जस्टिस वी. मोहना की तबीयत खराब होने से 15 अक्टूबर तक कार्रवाई टाल दी गई है। इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर विचार किया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता ने अवमानना का मामला उठाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।
अदालत ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि पूर्व में जारी निर्देशों का किस प्रकार पालन किया गया। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहरा दिया गया है। आरोपों पर अंतिम निर्णय जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही, सार्वजनिक परिवहन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह बंद करने तथा लोगों की आवाजाही बाधित होने से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप किया है।
अब संबंधित अधिकारियों के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि अदालत के निर्देशों का पालन किस हद तक हुआ और प्रतिबंधों के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। इस मामले पर आगे होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।