Explainer: दिल्ली में कितना मुश्किल है अवैध होटल चलाना? जानिए नियमों से कितनी अलग है जमीनी हकीकत
Delhi Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में होटल हादसे के बाद अवैध होटलों पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानिए राजधानी में होटल चलाने के नियम, कानून और जरूरी लाइसेंस की पूरी जानकारी।
- Written By: अक्षय साहू
दिल्ली मालवीय नगर होटल में आग से 21 लोगों की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Delhi Illegal Hotels Rules License: दिल्ली के मलवीय नगर इलाके में बुधवार को एक होटल में भीषण आग लग गई। जिसमें 12 विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की जलने और दम घुटने से मौत हो गई। घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शोक जताया और दोषियों को सजा दिलाने बात की कही और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए मुआवजे देने का ऐलान किया है।
इस घटना को लेकर सबसे बड़ी खबर तब सामने आई जब पता चला कि, होटल के मालिक ने कभी भी होटल के संचालन के लिए सरकार से लाइसेंस ही नहीं लिया था। इसके अलावा बिल्डिंग में सिर्फ छह कमरे बनाने की इजाज़त थी, लेकिन वहां 25 कमरे बनाए गए थे। यहां तक कि बिल्डिंग के बेसमेंट तक को भी कमरों में तब्दील कर दिया गया था और ये होटल पिछले कई सालों से इसी हाल में चल रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश की राजधानी दिल्ली में अवैध होटल चलाना इतना आसान है? दिल्ली में होटल चलाने के लिए नियम क्या हैं? और सरकार से एक होटल चलाने के लिए किन-किन चीजों का लाइसेंस (परमिशन) लेना जरूरी है?
दिल्ली में कितने होटल हैं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कुल 3,000 से 3,500 होटल हैं। जिन्हें दिल्ली पुलिस (लॉन्सिंग विभाग), दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली फायर सर्विस (DFS) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) से परमिशन मिली हुई है। जबकि अवैध होटलों की संख्या करीब 7000 है। इसमें वो होटल भी हैं जो रिहायशी इलाकों में छिपकर चलते हैं या केवल ऑनलाइन ऐप्स जैसे OYO, बुकिंग ऐप्स पर।
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दिल्ली में अवैध होटलों की है भरमार (सोर्स- सोशल मीडिया)
दिल्ली के पहाड़गंज, करोल बाग, महिपालपुर (एयरपोर्ट के पास) और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी वो इलाके हैं जिन्हे दिल्ली के होटलों का हब कहा जाता है। यहां आपको सस्ते से सस्ते होटल रहने के लिए मिल जाएंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इनमें से अधिकतर होटल अवैध हैं।
दिल्ली में इतने अवैध होटल क्यों हैं?
दिल्ली देश का सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है। एक अनुमान के मुताबिक 2026 में दिल्ली की जनसंख्या 3.55 करोड़ है। यहां हर दिन हजारों लोग दूसरे शहरों से आते हैं, जो ठहरने के लिए इन्हीं अवैध होटलों का इस्तेमाल करते हैं।ऐसा नहीं है कि इन इलाकों में वैध होटल नहीं है अकेले पहाड़गंज और करोल बाग में ही लगभग 1,200 से अधिक पंजीकृत गेस्ट हाउस और होटल्स हैं। लेकिन जिनका किराया अवैध होटलों के मुकाबले कहीं अधिक होता है। ऐसे में अक्सर लोग सस्ते के चक्कर में इन होटलों में जाना पसंद करते हैं।
दिल्ली में कैसे खोल सकते हैं होटल?
दिल्ली में होटल खोलने के लिए चाहिए 5-6 विभागों की मंजूरी (AI जनरेटेड फोटो)
दिल्ली में एक होटल खोलना नामुमकिन तो नहीं, लेकिन मुश्किल काम जरूर है। दिल्ली में होटल खोलने के लिए प्रमुख रूप से 5 से 6 विभागों की मंजूरी और 30 से अधिक एनओसी चाहिए।
- दिल्ली पुलिस: सुरक्षा और ‘लॉजिंग हाउस लाइसेंस’ के लिए।
- MCD / NDMC: ‘हेल्थ ट्रेड लाइसेंस’ और बिल्डिंग प्लान पास करने के लिए।
- दिल्ली फायर सर्विस: ‘फायर सेफ्टी एनओसी’ के लिए।
- DPCC: पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी के लिए।
- FSSAI: होटल के रेस्टोरेंट या किचन के लिए फूड लाइसेंस।
इसके अलावा बिजली (DISCOM), पर्यटन विभाग, और पानी के लिए दिल्ली जल बोर्ड से भी व्यावसायिक मंजूरी लेना जरूरी होता है। जिसमें पहले कई महीनों का समय लगता था, लेकिन सरकार ने इसे आसान बनाने के लिए संशोधित एकीकृत पोर्टल (Modified Unified Portal) लॉन्च किया है। जिसमें एक ‘कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म’ (CAF) के जरिए सभी प्रमुख विभागों में आवेदन किया जा सकता है।
होटल संचालन के लिए मुख्य नियम और शर्तें
जोंनिंग और लैंड यूज के तहत होटल केवल उसी क्षेत्र में खोला जा सकता है जिसे दिल्ली मास्टर प्लान के तहत कमर्शियल (व्यावसायिक) या मिक्स्ड-लैंड यूज के रूप में नोटिफाई किया गया हो। होटल की इमारत का नक्शा MCD से पास होना चाहिए और अधिकृत आर्किटेक्ट द्वारा जारी ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट’ (इमारत की मज़बूती का प्रमाण) होना जरूरी है।
दिल्ली में होटलों संचालन के लिए जरूरी नियम व शर्ते (AI जनरेटेड फोटो)
इसके अलावा होटल की एंट्री, लॉबी और कॉरिडोर CCTV कैमरे होना जरूरी है। जिनकी रिकॉर्डिंग क्षमता कम से कम 30 दिनों की होनी चाहिए। साथ ही होटल के संचालकों को अपने स्टाफ का वेरिफिकेशन करवाना भी जरूरी है। मतलब होटल में जो व्यक्ति काम कर रहा है उसकी जानकारी पुलिस को देना जरूरी है।
दिल्ली में कौन होटल खोल सकता है?
दिल्ली में भारत का कोई भी नागरिक जिसके पास वैध पहचान और पते का प्रमाण हो, वह अपना होटल खोल सकता है। इसके लिए उसे बिल्डिंग के स्वामित्व/किराये का प्रमाण, बिजनेस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, लिफ्ट सर्टिफिकेट और एकल शपथ पत्र का होना जरूरी है।
दिल्ली में कैसे चल रहे इतने अवैध होटल?
दिल्ली में एक अवैध होटल या गेस्ट हाउस चलाना कागजों पर जितना मुश्किल और गैरकानूनी लगता है। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दिल्ली में अवैध होटल चलाने वाले अक्सर नियमों की अनदेखी करते हैं। ऐसे लोग नियमों की कमियों और ढीले प्रशासन का फायदा उठाते हैं। जिसके पीछे वो लोग काम करते हैं, जिनकी जिम्मेदारी ऐसे होटलों के संचालन को बंद करना है। ये नामुमकिन है कि देश की राजधानी में इतनी बड़ी संख्या में अवैध होटलों का संचालन हो रहा है और इसकी जानकारी सरकार को नहीं है।
इसके अलावा ये कहना भी मुश्किल है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। इससे पहले ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां होटल संचालक अधिकारियों से सांठगांठ करके अपना धंधा चलाते पकड़े गए हैं।
अवैध होटलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका
अवैध होटलों के संचालन में एक बड़ी भूमिका ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स की भी है। अधिकतर ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स खुद को बड़ा दिखाने के लिए ऐसे होटलों को भी अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दे देते हैं, जो कानूनी रूप से वैध ही नहीं है। प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों की सस्ते होटलों की मांग को पूरा करने के लिए ऐसा करते हैं।
अवैध होटलों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका (AI जनरेटेड फोटो)
इसके अलावा दिल्ली के रिहायशी इलाकों में लोग छिपकर अपने घरों में होटल और गेस्ट हाउस चलाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इन्हें बाहर से देखकर बताया ही नहीं जा सकता है कि अंदर कोई होटल या गेस्ट हाउस चल रहा है।
दिल्ली में अवैध होटल चलाने की सजा
दिल्ली में अवैध होटल चलाने के लिए अलग-अलग और सख्त नियम हैं। अवैध होटल की जानकारी मिलने पर MCD होटल को तत्काल सील कर सकती है। इसके अलावा बिल्डिंग पर बुलडोजर एक्शन भी किया जा सकता है। साथ ही होटल पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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इसके अलावा धोखाधड़ी और अवैध संचालन, सुरक्षा और जालसाजी की धारों के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। वहीं किसी हादसे की स्थिति में गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में जेल भी भेजा जा सकता है।
