महीनों तक किया गया ब्रेनवॉश...फिर भी सुसाइड बॉम्बर बनने से इनकार कर गया जसीर
Suicide Bomber Refusal: दिल्ली में लाल किले के पास हुआ धमाका और भी भयानक हो सकता था अगर एक युवक ने ऐन मौके पर अपने कदम पीछे न खींचे होते। यह कहानी है काजीगुंड के रहने वाले जसीर बिलाल की, जिसे महीनों तक हरियाणा के फरीदाबाद में रखकर ब्रेनवॉश किया गया। आतंकी साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी ने उसे मानव बम बनाने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन जसीर के एक फैसले ने पूरी योजना को बदल दिया और सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक अलग ही सच उजागर हुआ।
जसीर बिलाल राजनीति विज्ञान का छात्र है। जांच में सामने आया है कि उसे साल 2023 से ही कट्टरपंथी बनाया जा रहा था। अक्टूबर 2023 में उसे कुलगाम से फरीदाबाद लाया गया, जहां अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास एक किराए के कमरे में रखकर उसे फिदायीन हमले के लिए तैयार किया गया। लेकिन जब अप्रैल 2025 में उसे हमला करने का आदेश मिला, तो उसने साफ मना कर दिया। जसीर ने दो वजहें बताईं, पहली उसके परिवार की खराब आर्थिक हालत और दूसरी सबसे अहम बात यह कि उसका धर्म इस्लाम आत्महत्या की इजाजत नहीं देता और यह एक पाप है।
जसीर के इनकार के बाद मास्टरमाइंड डॉ. उमर ने खुद विस्फोटक से भरी कार चलाने का फैसला किया। हाल ही में एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें उमर सुसाइड बॉम्बिंग को सही ठहराता दिख रहा है। 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस धमाके में 14 लोगों की जान चली गई। डीएनए जांच में पुष्टि हुई कि मरने वाला शख्स डॉ. उमर ही था। पुलिस ने जसीर की निशानदेही पर डॉ. अदील राथर और डॉ. मुजफ्फर गनई को भी गिरफ्तार किया है, जिससे जैश-ए-मोहम्मद के इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सका।
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इस मामले का एक बेहद दुखद पहलू भी सामने आया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूछताछ के लिए जसीर के पिता बिलाल वानी को बुलाया था। आरोप है कि हिरासत में लिए गए बेटे और भाई से मिलने न देने पर बिलाल वानी ने खुद को आग लगा ली। उन्हें इलाज के लिए एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पुलिस की निंदा की है। वहीं, जसीर को कड़ी सुरक्षा के बीच आज दिल्ली की अदालत में पेश किया गया है। यह घटना बताती है कि कैसे पढ़े-लिखे लोगों को भी आतंक के रास्ते पर धकेला जा रहा है।