PM मोदी पर कांग्रेस का जबरदस्त तंज, कहा- 75 के बाद भी पीएम बनने की चाह ने करा डाली RSS की तारीफ
Congress's taunt on Prime Minister: लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने आरएसएस की तारीफ की। उनके ऐसा करने पर कांग्रेस ने तंज करते हुए कहा कि इसके पीछे खुद के सियासी दांव को पूरा करना उनका मकसद है।
- Written By: गीतांजली शर्मा
पीएम मोदी ने की आरएसएस की प्रशंसा (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
PM Modi Praises RSS: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 15 अगस्त को देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पूरी जनता के लिए जोश से भरा भाषण दिया। उन्होंने आम जनता का संबोधन करते हुए पहली बार आरएसएस की प्रशंसा की।
आरएसएस के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि – आज गर्व के साथ मैं इस बात का जिक्र करना चाहता हूं कि 100 साल पहले एक संगठन आरएसएस का जन्म हुआ। 100 साल की ऐसी राष्ट्र सेवा सचमुच गौरवपूर्ण है।
आरएसएस ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल मां भारती के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सचमुच दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है।’
सम्बंधित ख़बरें
BJP विधायक की नाराजगी पर कांग्रेस ने खेली सियासी बिसात! जीतू पटवारी ने महेंद्र हार्डिया को क्यों कहा ‘धन्यवाद’
Datia News: एक मुलाकात ने बढ़ाई हलचल; राजेंद्र भारती के बेटे हो सकते हैं संभावित उपचुनाव में विकल्प
यूपी की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत, पंकज चौधरी ने नए OBC आयोग को क्यों बताया ऐतिहासिक?
‘कोई उलझाएगा तो खुद ही बचना होगा…’, CM मोहन यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में नवनियुक्त अध्यक्षों को दी सलाह
प्रधानमंत्री की इस बयान पर विपक्ष ने कसा तंज
प्रधानमंत्री मोदी ने जैसे ही कल यह भाषण आरएसएस जैसी संस्था को लेकर दिया। देखते ही देखते विपक्ष उनके इस बयान पर तंज कसता चला गया। मोहनभागवत की चापलूसी जैसी कई बातें उनके लिए कांग्रेस नेताओं द्वारा कही जाने लगी। भागवत को खुश करना प्रधानमंत्री का एकमात्र मकसद है, ताकि उनकी सत्ता 75 की उम्र के बाद भी बनी रहे।
इसलिए प्रधानमंत्री RSS की तारीफ करने में लगे हैं। मोदी की आरएसएस को लेकर की गई इस एक सकारात्मक टिप्पणी ने मानो वर्तमान की सारी सियासत को गरमा दिया। इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री मोहनभागवत को खुश करने के लिए मजबूर हैं। क्योंकि उनका आने वाला भविष्य भागवत ही तय करेंगे। यही कारण है कि मोदी जी आरएसएस की प्रशंसा करने में लगे हैं। सितंबर के बाद जब वे 75 साल के हो जाएंगे, तो पद पर बने रहे के लिए मोहन भागवत की मदद पर ही तो वह निर्भर हैं।’
यह भी पढ़ें: स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले पर क्यों नहीं पहुंचे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे?
साल 2014 के बाद बीजेपी में 75 साल की उम्र के बाद नेताओं को रिटायर करने का ट्रेंड चालू
साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी पार्टी में 75 साल की उम्र से ज्यादा आयु पार कर चुके नेताओं को रिटायर करने का प्रचलन शुरू किया जा चुका है, जो आज भी चालू है। पहली बार खुद प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में 75 साल से कम उम्र के लोगों को ही जगह दी थी।
वहीं पार्टी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया। इसी क्रम में जब साल 2016 में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा दिया, तो उस समय उनकी उम्र भी 75 साल थी। बीजेपी पार्टी के अंदर 75 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट का यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है, जो अभी भी ट्रेंड में है।
