छत्रपति शिवाजी महराज (फोटो- सोशल मीडिया)
नवभारत डिजिटल डेस्कः भारत में अनेकों हिंदू सम्राट हुए, लेकिन छत्रपति शिवाजी महराज ने हिंदुस्तान में मराठों का सूरज उगाया। उन्होंने हिंदू स्वराज की स्थापना के साथ ही हिंदवी स्वराज का संकल्प लिया। उनके युद्ध कौशव व दूरदर्शी सोच के सभी समकालीन शासक कायल रहे, आज भी उनके विचारों को सरकारें आत्मसात करती हैं। छत्रपति का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके भगवाध्वज की शान एक तरफ हिंदुस्तानियों को गौरान्वित करती थी, तो वहीं मुगलों की आंखों की किरकरी था।
जब औरंगजेब ने दक्कन पर हमला किया तो शिवाजी ने अहमदनगर और रेसिन के दुर्ग पर हमला किया था। इन युद्धों में शिवाजी ने कई बार औरंगजेब की सेनाओं को हराया। इतना ही नहीं पुणे के लाल महल किए में छत्रपति शिवाजी महाराज का बचपन बीता था, लेकिन उस पर कुछ समय बाद औरंगजेब के मामा जनरल शाइस्ता खान का कब्जा हो गया। किले के अंदर लाखों की सेना थी, लेकिन छत्रपति शिवाजी के युद्ध कौशल के सामने शाइस्ता खान जान बचाकर भगना पड़ा। इस दौरान उन्होंने शाइस्ता खान की उंगलियां काट दी थीं।
35 साल में जीत डाले 300 से ज्यादा किले, टेंशन में औरंगजेब
शिवाजी महाराज एक नौसैनिक रणनीतिकार के साथ-साथ किले की लड़ाई के भी उस्ताद थे। किलों पर विजय प्राप्त करने की शुरुआत शिवाजी महाराज ने 16 साल से कम उम्र में बीजापुर के तोरणा किले से की थी।जीवन के 35 साल के दौरान शिवाजी ने 300 से अधिक किलों पर विजय प्राप्त की थी। इन किलों ने जमीनी और समुद्री रक्षा दोनों में अहम भूमिका निभाई। 1674 में उन्हें औपचारिक रूप से मराठा साम्राज्य के राजा के रूप में ताज पहनाया गया। उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए इसमें वर्तमान महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के महत्वपूर्ण हिस्सों को शामिल किया।
विजयादशमी पर लिया था हिंदवी स्वराज का संकल्प
भारत में विजयादशमी को शुभ अवसर माना जाता है, इसी दिन भगवान राम रावण से युद्ध के लिए प्रस्थान किया था। महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में विजयादशमी को जीत के सदर्भ में देखा जाता है। इस दिन को हर्षोल्लास के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। इसी दिन मराठा रत्न छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी औरंगजेब के विरुद्ध युद्ध के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा करने और हिंदवी स्वराज कायम करने का बीड़ा उठाया था।
शिवाजी ने मुगलों के मुंह से छीन लिए किले
जब औरंगजेब ने धोखे से शिवाजी को कैद कर लिया तो उसने उनकी हत्या कराने की सोची। हालांकि, 17 अगस्त 1666 को शिवाजी और संभाजी औरंगजेब के किले से फलों की टोकरी में बैठकर भागने में कामयाब रहे। इसके बाद साल 1668 में शिवाजी और मुगलों के बीच समझौता हुआ। फिर 1670 में शिवाजी ने सूरत के पास मुगल सेना को बुरी तरह हराया। पुरंदर की संधि के तहत शिवाजी ने जो किले मुगलों को दिए थे, उन पर 4 साल बाद ही शिवाजी का फिर से कब्जा हो गया।
जब शिवाजी महाराज बने मराठों के अधिपति
छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक 6 जून, 1674 को रायगढ़ में हुआ था। इस दिन उन्हें काशी के एक पंडित गागभट्ट की अगुवाई में मराठों का राजा घोषित किया गया था। शिवाजी महाराज ने 16 वर्ष की उम्र में ही स्वराज्य स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। विजयनगर का पतन होने के बाद दक्षिण भारत में यह पहला हिंदू साम्राज्य था, जिसकी स्थापना के बाद शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज का ऐलान कर दिया था।