प्रतीकात्मक चित्र (सोर्स- सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: आज यानी बुधवार 19 फरवरी को उस महान हस्ती की जयंती है जो भारतीय इतिहास के स्वर्णि पृष्ठों पर शूरवीर के तौर पर अमर है। जिसने न केवल मुगलों की नाक में दम किया बल्कि अलग मराठा साम्राज्य की स्थापना कर उन्हें मां भारती के सपूतों के सच्चे पौरुष से भी अवगत कराया। जी हां, आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है।
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर हम आपके लिए उनसे जुड़ी एक दिलचस्प कहानी लेकर आए हैं। ये कहानी है उनके सूर्य बनकर उदय होने की। यह कहानी है मराठा सम्राज्य के गौरव की। यह कहानी है मुगलों को मात देने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की।
शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में शाहजी भोसले और जीजाबाई के घर हुआ था। उनका जन्म पुणे के उत्तर में जुन्नार के शिवनेरी किले में हुआ था। उनका पालन-पोषण जीजाबाई के मार्गदर्शन में हुआ। उनके पिता अहमदनगर के निज़ाम थे और बाद में बीजापुर के दरबार में काम करने लगे।
बचपन से ही शिवाजी का सपना अलग मराठा राज्य का था। 18 साल की उम्र में ही उन्होंने सेना इकट्ठी करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने कई छोटे-छोटे राज्यों पर हमला किया और उन्हें जीत भी लिया। शिवाजी ने कई किलों पर विजय प्राप्त की और उन्हें अपने अधीन कर लिया। शिवाजी के बढ़ते प्रभुत्व को देखकर बीजापुर के सुल्तान को डर लगने लगा। उसने अपने सेनापति अफ़ज़ल के साथ अपनी सेना पुणे की ओर भेज दी।
अफ़ज़ल शिवाजी को धोखे से मारना चाहता था। लेकिन शिवाजी उसकी चाल समझ गए और अफ़ज़ल के हमला करने से पहले ही उन्होंने बाघनख के एक ही वार से उसे नरक में भेज दिया। मुगलों के सबसे शक्तिशाली सेनापति के मारे जाने के बाद वे शिवाजी की शौर्य से भयभीत हो गए।
इसके बाद जब औरंगजेब दिल्ली की गद्दी पर बैठा तो वह शिवाजी को चुनौती के रूप में देखने लगा। जब शिवाजी ने सूरत पर कब्जा कर लिया तो औरंगजेब और भी ज्यादा बौखला गया। उसने 1666 में धोखे से शिवाजी को आगरा में कैद कर लिया। शिवाजी जानते थे कि अगर वह लंबे समय तक मुगलों की कैद में रहे तो मराठा साम्राज्य का उनका सपना अधूरा रह जाएगा।
छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी अन्य रोचक कहानियों के लिए यहां क्लिक करें
इसके बाद शिवाजी अपने भाई संभाजी के साथ एक टोकरी में औरंगजेब की कैद से बाहर आए। इसके बाद वह सीधे पुणे में उपस्थित हुए। इसके बाद 1669 में ही शिवाजी ने मुगलों को परास्त कर दिया। 1674 में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह छत्रपति बने।