गृह मंत्रालय (सोर्स: सोशल मीडिया)
CAPF Assistant Commandant Appointment Delay: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सहायक कमांडेंट पद पर चयनित लगभग 450 उम्मीदवार पिछले आठ महीनों से अनिश्चितता में हैं। सभी औपचारिक चरण लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षण पूरे हो जाने के बावजूद अब तक उन्हें किसी भी बल में औपचारिक रूप से नियुक्त नहीं किया गया है। इस असामान्य देरी ने चयनित अभ्यर्थियों के सामने आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इन अभ्यर्थियों ने वर्ष 2024 में परीक्षा दिया था।
यह पूरी भर्ती प्रक्रिया संघ लोक सेवा आयोग के जरिए संपन्न हुई थी। इस वर्ष नियुक्ति प्रक्रिया की नोडल फोर्स इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस है। आईटीबीपी का कहना है कि बल आवंटन से जुड़ा अंतिम निर्देश गृह मंत्रालय से आना अभी शेष है और उसी के बाद आगे की कार्रवाई संभव हो पाएगी।
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले वर्षों में अंतिम परिणाम घोषित होने के एक से तीन महीने के भीतर बल आवंटन हो जाया करता था। 2021 से 2023 के बैच में यह प्रक्रिया 46 से 96 दिनों के भीतर पूरी हो गई थी, लेकिन इस बार 250 दिन बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। न प्रशिक्षण शुरू हो पा रहा है और न ही वेतन, जिससे कई उम्मीदवारों की निजी और पेशेवर योजनाएं अटक गई हैं।
उम्मीदवारों के अनुसार, इस समय सशस्त्र सीमा बल अकादमी में कोई प्रशिक्षण बैच नहीं चल रहा है और पासिंग आउट परेड पहले ही हो चुकी है। सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट की पीओपी पूरी हो चुकी है, जबकि केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल में अगले महीने पीओपी होने की संभावना है। बल आवंटन के बाद ही यूपीएससी द्वारा रिज़र्व सूची जारी की जाती है, जिसमें शेष उम्मीदवारों के नाम सामने आते हैं।
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इस भर्ती के तहत लगभग 500 पदों के लिए 4 अगस्त 2024 को परीक्षा हुई थी। अब तक 450 पदों का परिणाम घोषित किया जा चुका है, जबकि बाकी नाम रिजर्व सूची से आने हैं। मेडिकल परीक्षण दिसंबर 2024 में पूरे किए गए थे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 100 के बाद की रैंक प्राप्त करने वालों को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि उन्हें किस बल में तैनाती मिलेगी। इस बारे में यूपीएससी से संपर्क करने पर भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
चयनित युवाओं का मानना है कि इतनी लंबी देरी से भविष्य के ग्राउंड कमांडरों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। कड़ी परीक्षा पास करने के बाद भी वर्दी पहनने का अवसर न मिलना उनके पूरे करियर प्रशिक्षण, तैनाती और पदोन्नति की समय-रेखा पर असर डाल सकता है। उनके लिए सीएपीएफ में सहायक कमांडेंट के रूप में करियर शुरू करना सम्मान और देशसेवा दोनों का प्रतीक है, यही वजह है कि वे किसी अन्य क्षेत्र की ओर देखने का मन भी नहीं बनाते।