Budget 2026: राष्ट्रपति की दही-चीनी रस्म के पीछे क्या है राज? सिर्फ परंपरा नहीं, ये है वजह
Budget Ritual: यूनियन बजट से पहले राष्ट्रपति की दही-चीनी रस्म सिर्फ एक औपचारिक परंपरा नहीं, बल्कि शुभता और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। भारतीय संस्कृति में दही-चीनी को शुभ माना जाता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
बजट से पहले राष्ट्रपति द्वारा दही-चीनी की रस्म निभाते पल (सौ. सोशल मीडिया)
Budget 2026 Curd Sugar Ritual: केंद्रीय बजट 2026 पेश करने से पहले राष्ट्रपति भवन में एक बेहद खास और पारंपरिक दृश्य दिखाई दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम का मुंह मीठा कराकर दही-चीनी का शगुन किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सदियों पुरानी यह परंपरा सिर्फ एक अंधविश्वास नहीं बल्कि विज्ञान और आयुर्वेद का एक सटीक मेल है।
रविवार को आम बजट पेश करने की औपचारिक शुरुआत से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की मेजबानी की। राष्ट्रपति ने पूरी टीम को पारंपरिक तरीके से दही-चीनी खिलाकर बड़ी जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। यह रस्म न केवल सफलता की कामना है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक मानी जाती है।
बजट और दही-चीनी का विज्ञान
आमतौर पर हम इसे घर की बुजुर्ग महिलाओं का नुस्खा मानते हैं लेकिन इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक तर्क है। बजट पेश करना एक बेहद तनावपूर्ण और लंबी प्रक्रिया है। दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और तनाव के कारण होने वाली पेट की समस्याओं को रोकता है। वहीं चीनी ग्लूकोज का तत्काल स्रोत है जो मस्तिष्क को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। यह मेल एकाग्रता बढ़ाने और थकान को दूर रखने में मदद करता है।
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दही चीनी के फायदे
आयुर्वेद के नजरिए से देखें तो दही एक कूलिंग एजेंट और सात्विक भोजन है। यह शरीर को ठंडक देता है और मन को स्थिर रखता है। चीनी के साथ मिलकर यह एक ऐसा संतुलन बनाता है जो शरीर में हैप्पी हार्मोन्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के स्तर को बढ़ाता है। इससे व्यक्ति का मूड अच्छा रहता है और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है जो बजट जैसे महत्वपूर्ण दिन के लिए अनिवार्य है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
भारतीय संस्कृति में सफेद रंग और दही को शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है। वहीं मीठा अच्छे परिणामों और मधुरता का संकेत है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी दही का संबंध चंद्रमा से है और चीनी का संबंध गुरु से माना जाता है। इन दोनों का मेल मन को स्पष्ट और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
चाहे वह परीक्षा हो इंटरव्यू हो या देश का बजट दही-चीनी का यह छोटा सा शगुन भारतीय संस्कृति की उस गहराई को दर्शाता है जहां परंपराएं और आधुनिक आवश्यकताएं एक साथ चलती हैं। यह परंपरा भारत के विभिन्न कोनों में कहीं दही-गुड़ तो कहीं दही-चीनी के रूप में मौजूद है लेकिन इसका मूल भाव एक ही है “नई शुरुआत मीठी और सफल हो।”
