विपक्ष को भारी पड़ेगा महिला आरक्षण का विरोध? बीजेपी ने बनाया बंगाल-तमिलनाडु चुनाव के लिए मास्टरप्लान!
BJP Protest: महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) गिरने के बाद बीजेपी और एनडीए देशभर में 'इंडिया' गठबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसे नारी शक्ति का अपमान और लोकतंत्र का काला अध्याय बताया गया है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
लोकसभा में महिला सांसदों का प्रदर्शन (Image- Social Media)
Women Reservation Bill BJP Protest: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एनडीए के सहयोगी दल शनिवार को पूरे देश में इंडिया गठबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक गिरने के बाद एनडीए घटक दलों की बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया कि विपक्ष द्वारा महिला आरक्षण बिल का विरोध देशभर में मुद्दा बनाया जाएगा। इसके तहत प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए इस विषय को उठाया जाएगा।
बीजेपी महिला मोर्चा के नेतृत्व में ये प्रदर्शन देश के सभी जिला मुख्यालयों पर आयोजित किए जाएंगे। लोकसभा में बिल पास न होने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में भी विरोध जताया।
पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP बनाएगी मुद्दा
बीजेपी ने इसे नारी शक्ति के लिए बड़ा झटका बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक अवसर रोक दिया।
पार्टी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के आगामी चुनावों में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की योजना बना रही है। वह इसे सीटों में बढ़ोतरी और 2029 तक आरक्षण लागू करने के छूटे हुए मौके के रूप में पेश करेगी।
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राहुल गांधी ने इसे पास नहीं होने दिया
बीजेपी सांसद पूनमबेन मदाम ने कहा कि 2023 में तय किया गया था कि 2029 के आम चुनाव तक महिला आरक्षण लागू कर दिया जाएगा, लेकिन सरकार द्वारा लाए गए बिल का राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने विरोध किया और इसे पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस कदम को माफ नहीं करेंगी।
विपक्ष ने अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन विपक्ष ने इसके खिलाफ मतदान कर अपनी सोच उजागर कर दी। उनके अनुसार, यह केवल एक बिल नहीं बल्कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने का अवसर था।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की अपील की थी, लेकिन विपक्ष ने अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी। इसके बावजूद सरकार महिला सशक्तिकरण के अपने संकल्प पर कायम रहेगी।
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लोकतंत्र के लिए “काला अध्याय”
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस दिन को लोकतंत्र के लिए “काला अध्याय” बताया और कहा कि यह घटना विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। उनके अनुसार, यह केवल विधेयक का गिरना नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंचाना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपना असली चेहरा दिखा दिया है।
