
भाजपा स्थापना दिवस (कॉन्सेप्ट फोटो)
नई दिल्ली: 6 अप्रैल 1980 को स्थापित भारतीय जनता पार्टी आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। भाजपा अपने स्थापना दिवस को मनाने की तैयारियां जोरों पर कर रही है। बीजेपी की सक्सेज में आडवाणी की रथयात्रा, अटल बिहारी वाजपेयी की साफ-सुथरी राजनीति के किस्से आपने पहले भी सुने होंगे। लेकिन बीजेपी 2.0 के अपराजेय युग शुरू होने के पीछे की वजहों से आप आज भी नावाकिफ होंगे!
वर्ष 2014 में जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर लोकसभा चुनाव जीता और हम सिर्फ ‘मोदी लहर’ जैसे एक शब्द को बीजेपी का सफलता सूत्र मान बैठे। लेकिन वास्तविकता में भारतीय जनता पार्टी की कामयाबी में मोदी लहर नहीं बल्कि कुछ ऐसे कारण थे जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। तो चलिए हम आपको वो वजहें बताते हैं जिसने बीजेपी को सफलता के उत्तुंग शिखर पर काबिज कर दिया।
2014 के लोकसभा चुनाव बीजेपी की जीत के पीछे कांग्रेस सरकार के प्रति एंटी इन्कंबेंसी और नरेन्द्र मोदी की पीएम पद का उम्मीदवार बनाना था। इस समय पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर राजनाथ सिंह आसीन थे। लेकिन उसके बाद जो कुछ हुआ वह पार्टी की असली सफलता थी। क्योंकि इससे पहले हर बार यह होता आया था कि जब भी किसी दूसरी पार्टी की सरकार बनी तो कांग्रेस ने अगले चुनाव में तगड़ा पलटवार किया।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में काबिज है। 2014 और 2019 के मुकाबले 2024 के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन भले ही खराब रहा हो, लेकिन इतने सालों से पार्टी का स्वर्णिम काल चल रहा है। भाजपा को इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन फैसलों ने अहम भूमिका निभाई, उनमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना और मोदी के सेनापति अमित शाह को जीतने के बाद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना शामिल था।
नरेन्द्र मोदी व अमित शाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
जब अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, तब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी थी। 2015 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही शाह ने पार्टी की नीतियों में बदलाव किया और उस साल सदस्यता के मामले में इसे दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया। चूंकि भाजपा ने लोकसभा में अप्रत्याशित जीत हासिल की थी, इसलिए अमित शाह को खुलकर फैसले लेने की छूट दी गई और उन्होंने निराश नहीं किया।
भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने जो पहला बड़ा काम शुरू किया, वह था पार्टी का सदस्यता अभियान शुरू करना। उस समय देश में मोदी लहर थी, जिसके चलते एक-एक करके लोग भाजपा से जुड़ते चले गए और नतीजा यह हुआ कि 2015 में ही देशभर में भाजपा के कुल सदस्यों की संख्या 10 करोड़ को पार कर गई।
भारतीय जनता पार्टी (सोर्स- सोशल मीडिया)
दरअसल, यह पहला मौका था, जब भाजपा को जनता से सीधे जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किया गया। भाजपा की यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि चीन में एक ही पार्टी है, जबकि भारत में बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यहां कई राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय पार्टियां हैं। भाजपा इनके बीच पैठ बनाने में सफल रही।
भारतीय जनता पार्टी ने तकनीक की ताकत को समझा और उसका भरपूर इस्तेमाल किया। तकनीक ने ही सदस्यता अभियान को बढ़ावा दिया और सदस्यों की पुष्टि संभव की। पहले सदस्यों की पुष्टि भौतिक रूप से संभव नहीं थी। इसके लिए भाजपा का सदस्य बनना बेहद आसान कर दिया गया।
अब लोग घर बैठे मोबाइल के जरिए इसके सदस्य बन सकते हैं। इसके लिए भाजपा की वेबसाइट पर जाकर एक फॉर्म भरना होता है और मोबाइल नंबर देना होता है। ऐसा करने से कोई भी व्यक्ति भाजपा का सदस्य बन जाता है। दूसरा तरीका इससे भी आसान है। पार्टी के टोल फ्री नंबर पर मिस्ड कॉल देकर कोई भी सदस्य बन सकता है।
नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह व जेपी नड्डा (सोर्स- सोशल मीडिया)
सदस्यता अभियान ही नहीं, भाजपा ने पार्टी की प्रबंधन क्षमता और जवाबदेही तय करने के लिए भी बड़े पैमाने पर तकनीक का इस्तेमाल किया। पार्टी ने आंतरिक बैठकों के लिए ऑनलाइन एप का इस्तेमाल किया। आपसी संवाद के लिए व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाए गए, सभी नए और पुराने सदस्यों के फोन नंबर की लिस्टिंग की गई आदि। भाजपा ने लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल किया। इससे भी लोग पार्टी की ओर आकर्षित हुए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने भाजपा के परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए राज्यवार सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर जोर दिया। उन्होंने अपना हिंदुत्व का मुखौटा बरकरार रखा। राम मंदिर आंदोलन से मिली पहचान को उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जोड़ा और पूरे देश और दुनिया में इसका प्रचार किया।
जिस भी राज्य में चुनाव हुए, बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने इस पर जोर दिया। नतीजा यह हुआ कि पार्टी को न सिर्फ वोट मिले, बल्कि सदस्य जोड़ने में भी सफलता मिली। अमित शाह के बाद आए पार्टी अध्यक्षों ने भी इस फॉर्मूले को बरकरार रखा और उन राज्यों पर ज्यादा फोकस किया, जहां पार्टी की स्थिति कमजोर थी।
उन्होंने अपने तेजतर्रार नेताओं को प्रचार के लिए भेजा। भाजपा ने अपने विस्तार के लिए संगठन को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम भी किया। सबसे पहले बाहरी संगठन को दक्ष और तत्पर बनाया। पार्टी में आमतौर पर कोई आंतरिक संघर्ष या मतभेद सामने नहीं आए। फिर निचले स्तर पर संगठन का पुनर्गठन किया गया। इसमें जिले से लेकर मतदान केंद्र स्तर तक संगठन में पदाधिकारी नियुक्त किए गए।
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यहां तक कि पन्ना प्रमुख भी नियुक्त किए, जिनकी जिम्मेदारी मतदाता सूची में शामिल एक निश्चित संख्या में मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखना है। साथ ही पार्टी में काम और अधिकार का विकेंद्रीकरण किया गया। स्थानीय कार्यकर्ताओं को अधिकार दिए गए। पार्टी संगठन के हर स्तर पर वंचित समुदायों के लोगों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया। हर स्तर पर प्रबंधन के साथ-साथ निगरानी की भी व्यवस्था की गई।






