अकबर (फोटो-विकिपीडिया)
नवभारत डेस्क: भारत के महान मुगल सम्राट अकबर की जयंती 15 अक्टूबर को मनाई जाती है। अकबर को मुगल-ए-आजम के नाम से जाना जाता है। अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को उमरकोट में हुआ था। जो अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है। अकबर का पूरा नाम अबू अल-फतह जलाल अल-दीन मुहम्मद अकबर है। उन्होंने 1556-1605 तक शासन किया। भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में मुगल सत्ता का विस्तार किया और साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सुधारों को भी बढ़ावा दिया।
अकबर को महज 13 साल की उम्र में पंजाब क्षेत्र का गवर्नर बनाया गया था। अकबर के पिता हुमायूं का निधन भी उसी समय हो गया। जिसके बाद दिल्ली की गद्दी पर हेमू ने कब्जा कर लिया था। 5 नवंबर 1556 को मुगल सेना ने पानीपत की दूसरी लड़ाई हेमू को हरा दिया और दिल्ली की गद्दी पर फिर से कब्जा कर लिया, जिसमें अकबर को राजा बनाया गया।
1560 में बयराम के सेवानिवृत्त होने के बाद अकबर ने अपने दम पर शासन कर शुरू किया। सबसे पहले उन्होंने मालवा पर हमला किया और 1561 में उसे अपने कब्जे में ले लिया। 1568 में अकबर ने चित्तौड़ के किले पर कब्जा कर लिया और उसके निवासियों को मार डाला। जिसके बाद 1570 में चित्तौड़ की जनता ने अकबर को अपना राजा स्वीकार कर लिया।
1573 में अकबर ने गुजरात पर जीत हासिल की। गुजरात पर विजय प्राप्त करने के बाद अकबर की नजर बंगाल पर थी। बंगाल के अफ़गान शासकों ने 1575 में अकबर के वर्चस्व के आगे आत्मसमर्पण कर दिया। अपने शासनकाल के आखिरी दौर में अकबर ने 1586 में कश्मीर, 1591 में सिंध और 1595 में अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया। अकबर ने अपने पूरे शासनकाल में भारतीय उपमहाद्वीप के दो-तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया था।
अकबर ने अपने शासन में कई प्रशासनिक सुधार किए। उन्होंने एक कुशल प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया, जिसमें राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाया। उनके तहत भूमि राजस्व प्रणाली को ‘जिजिया’ कर के माध्यम से भी जाना गया, जो उनकी समग्र नीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
अकबर का एक प्रमुख योगदान धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना था। उन्होंने ‘दीन-ए-इलाही’ नामक एक धर्म की स्थापना की, जिसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करना था। उन्होंने हिन्दू, जैन, सिख और इस्लाम जैसे धर्मों के बीच समर्पण को बढ़ावा दिया।
अकबर के शासनकाल में कला और संस्कृति का भी विकास हुआ। उन्होंने फतेहपुर सीकरी जैसे अद्भुत शहरों का निर्माण किया, जो उनकी वास्तुकला की प्रतिभा का प्रतीक है। उनके दरबार में कई प्रसिद्ध कलाकार और लेखक थे, जिन्होंने साहित्य और चित्रकला को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
अकबर की जयंती पर, हमें उनकी दीर्घकालिक विरासत को याद करना चाहिए। उनके विचार और नीतियाँ आज भी हमें एकता, सहिष्णुता और सामाजिक समरसता का संदेश देती हैं। उनकी गाथा हमें यह सिखाती है कि एक सच्चे नेता को सभी धर्मों और जातियों का सम्मान करना चाहिए।