प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Bharat Bandh 12 February 2026: केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और हालिया अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ आज देशव्यापी ‘भारत बंद’ है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नए लेबर कोड को ‘मजदूर-किसान विरोधी’ बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। इस बंद को राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है।
आज के भारत बंद का फोकस प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच हुआ भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता है। किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल देगा जिससे डेयरी उत्पाद, अनाज और सोयाबीन जैसे उत्पाद सस्ते दामों पर भारत आएंगे और स्थानीय किसानों की कमर टूट जाएगी। एसकेएम ने इसे ‘आर्थिक उपनिवेशवाद’ का ब्लूप्रिंट करार देते हुए प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के पुतले जलाने की अपील भी की है।
इसके साथ ही, चार नए लेबर कोड को लेकर भी भारी आक्रोश है। यूनियनों का दावा है कि ये कोड 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेंगे, जिससे मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा कम होगी और कंपनियों को भर्ती-छंटनी की मनमानी छूट मिल जाएगी।
प्रदर्शनकारी बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि नए बिजली कानून से स्मार्ट मीटर थोपे जाएंगे और बिजली की दरें बढ़ेंगी, जिससे खेती और घरेलू बजट दोनों प्रभावित होंगे। वहीं, बीज विधेयक को लेकर आशंका है कि इससे बीजों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का कब्जा हो जाएगा और स्थानीय बीजों की कालाबाजारी बढ़ेगी। किसान संगठनों की मांग है कि सभी को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए और बीजों पर किसानों का अधिकार सुरक्षित रहे।
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मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में VB-G RAM G अधिनियम-2025 को लेकर नाराजगी है, जिसे मनरेगा को कमजोर करने या उसकी जगह लेने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और सभी योजना कार्यकर्ताओं (जैसे आशा और आंगनबाड़ी) के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग पर अड़े हैं। किसानों की पुरानी मांग, यानी सभी फसलों पर ‘C2+50 प्रतिशत’ फॉर्मूले के तहत MSP की कानूनी गारंटी, भी इस आंदोलन का अहम हिस्सा है।
आज के बंद का असर परिवहन, बैंकिंग और मंडियों पर पड़ने की संभावना है।
• परिवहन: कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी यूनियनों के समर्थन से यातायात प्रभावित हो सकता है।
• बैंकिंग: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं, हालांकि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और एटीएम सामान्य रहेंगे।
• बाजार: कई थोक और खुदरा बाजारों के आंशिक रूप से बंद रहने की उम्मीद है।
• आपातकालीन सेवाएं: अस्पताल, एम्बुलेंस, दमकल विभाग और हवाई यात्रा जैसी आवश्यक सेवाएं इस बंद से मुक्त रहेंगी।
राहुल गांधी ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार मजदूरों और किसानों की आवाज को नजरअंदाज कर रही है। वहीं पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने भी इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।