

Abhijit Dipke Questions Fadnavis Banners: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर शक्ति प्रदर्शन के नए-नए तरीके देखे जाते हैं, लेकिन इस बार तिरंगा रैली के नाम पर हुई ब्रांडिंग ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। छत्रपति संभाजीनगर की सड़कें इन दिनों तिरंगे से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विशालकाय बैनरों से पटी नजर आ रही हैं।
इस चकाचौंध के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अपने गृहनगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंचते ही शहर का नजारा देख अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए सीधे तौर पर यह सवाल उठाया है कि क्या देशभक्ति की इस तिरंगा रैली के लिए इतने भव्य और खर्चीले बैनरों की वाकई आवश्यकता है?
अभिजीत दीपके का तर्क है कि जिस पैसे का इस्तेमाल आत्म-प्रचार और राजनीतिक विज्ञापनों में किया जा रहा है, उसका बेहतर उपयोग समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए किया जा सकता था।
वीडियो में दीपके ने ग्रामीण महाराष्ट्र की उस कड़वी हकीकत को सामने रखा है, जो अक्सर राजनीतिक रैलियों के शोर में दब जाती है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की स्थिति दयनीय है। एक तरफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बैनर पूरे शहर को ढक रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण महाराष्ट्र के छात्र स्कूल जाने के लिए एक अदद पक्की सड़क की गुहार लगा रहे हैं।
यह मुद्दा केवल एक रैली या कुछ बैनरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास के उस मॉडल पर सवाल उठाता है जहां करोड़ों रुपये केवल दिखावे पर खर्च कर दिए जाते हैं।
अभिजीत दीपके ने सुझाव दिया कि यदि इसी धन को ग्रामीण स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने में लगाया जाता, तो यह तिरंगा रैली और भी सार्थक होती।
अभिजीत दीपके द्वारा साझा किया गया यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। आम नागरिक भी अब यह पूछ रहे हैं कि क्या तिरंगे के सम्मान के नाम पर व्यक्तिगत छवि चमकाना सही है? जहां एक ओर तिरंगा रैली का स्वागत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी भरकम खर्च को लेकर जनता की भौहें तनी हुई हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और सत्ताधारी दल इस आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन फिलहाल छत्रपति संभाजीनगर के ये विशाल बैनर विकास के दावों और ग्रामीण इलाकों की बदहाली के बीच एक गहरी खाई को दर्शा रहे हैं।