रामलला के मुख्य पुजारी के आरोपों को चंपत राय ने किया खारिज, कौन सच्चा-कौन झुठा, कन्फ्यूजन में भक्त
राम मंदिर की छत से पानी टपकने का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। मुख्य पुजारी सत्येंद्र मिश्र का आरोप है कि मंदिर निर्माण कार्य में लापरवाही हुई है। वहीं इस बयान को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय ने खारिज किया है। ऐसे में अब करोड़ों रामभक्त कन्फ्यूजन में है कि, आखिर सच क्या है।
- Written By: राहुल गोस्वामी
(डिज़ाइन फोटो)
अयोध्या: जहां एक तरफ बारिश के बाद राम मंदिर की छत से पानी टपकने का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। वहीं इसको लेकर लोगों के रोज बयान सामने आ रहे हैं। अब तो चर्चा इस बात की है कि आखिर करोड़ों रुपयों की लागत से बना मंदिर पहली ही बरसात का क्यों नहीं झेल पाया? यह समस्या इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि छत टपकने की बात मंदिर के किसी और दुसरे हिस्से की नहीं बल्कि गर्भ गृह की ही है, जहां रामलला की भव्य मूर्ति विराजमान है। श्रद्धालु और अधिकारी इसे लेकर बहुत चिंतित हैं और इस पवित्र स्थल की पवित्रता और संरचनात्मक अखंडता को बनाए रखने के लिए तत्काल मरम्मत की आवश्यकता पर लगातार जोर दे रहे हैं।
सत्येंद्र मिश्र का संगीन आरोप
मामले में राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र मिश्र का आरोप है कि मंदिर निर्माण कार्य में लापरवाही हुई है। पहली बारिश में ही गर्भगृह में पानी टपकने लगा है, जिसे हाल ही में ठीक किया गया था। बताया गया कि गर्भगृह के सामने दर्शनस्थल पर भी पानी भर गया था। भारी बारिश के बाद पुजारी जब भगवान के पूजन के लिए मंदिर गए, तो वहां पर पानी भरा मिला, जिसे बाहर निकालने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
चम्पत राय-सत्येंद्र मिश्र का मतैक्य
अब इस बयान को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय ने खारिज करते हुए कहा बीते गुरुवार को कहा कि गर्भगृह में जहां भगवान रामलला विराजमान हैं, वहां एक भी बूंद पानी छत से नहीं टपका है और न ही अंदर कहीं से कोई पानी आया है। उन्होंने कहा,”श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में वर्षा काल के दौरान छत से पानी टपकने के संदर्भ में कुछ तथ्य आपके सामने रख रहा हूँ। पहली बात तो यह है कि गर्भगृह में जहाँ भगवान रामलला विराजमान है, वहाँ एक भी बूंद पानी छत से नहीं टपका है और न ही कहीं से पानी गर्भगृह में आया है।”
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उन्होंने कहा कि सभी ‘जंक्शन बॉक्सों’ के माध्यम से पानी प्रवेश किया और वही पानी नाली के पाइपों के माध्यम से भूतल पर गिर गया और ऐसा लग रहा था कि पानी छत से टपक रहा है, जबकि वास्तव में पानी नाली के पाइपों की मदद से भूतल पर आ रहा था। राय का अनुसार पहली मंजिल का फर्श पूरी तरह से जलरोधी हो जाएगा और किसी भी ‘जंक्शन बॉक्स’ से पानी का प्रवेश नहीं होगा और पानी नाली के माध्यम से नीचे तक नहीं पहुंचेगा।
राय ने कहा कि मंदिर और पार्क परिसर में बारिश के पानी की निकासी के लिए एक सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है, जिसका काम अभी चल रहा है, इसलिए मंदिर और पार्क परिसर में कहीं भी जलभराव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि परिसर में बारिश के पानी को पूरी तरह से संग्रहित करने के लिए ‘रिचार्ज पिट’ का निर्माण भी किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर को बरसात के पानी के लिए बाहर शून्य वाटर डिस्चार्ज के लिए प्रबंधन किया गया है।
नृपेन्द्र मिश्रा भी दे चुके बयान
गौरतलब है कि, मुख्य पुजारी सत्येंद्र मिश्र के बयान को अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने भी बीते मंगलवार को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की छत से पानी नहीं टपक रहा था बल्कि बौछार आने से पानी आ गया था। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि अयोध्या में दो दिन हुए वर्षा के दौरान गर्भगृह जहां भगवान रामलला विराजमान हैं वहां एक भी बूंद पानी छत से नहीं टपका है और न ही कहीं से पानी गर्भगृह में प्रवेश हुआ है।
चम्पत राय और ट्रस्ट के मुताबिक उत्तर भारत में बिना लोहे का उपयोग किए केवल पत्थरों से मन्दिर निर्माण कार्य प्रथम बार हो रहा है। देश विदेश में केवल स्वामी नारायण परम्परा के मंदिर ही अब तक पत्थरों से बने हैं। भगवान के विग्रह की स्थापना, दर्शन पूजन और निर्माण कार्य केवल पत्थरों के मंदिर में संभव है। ऐसे में शायद जानकारी के अभाव में मुख्य पुजारी सत्येंद्र मिश्र का मन विचलित हो रहा हो। वहीं नृपेंद्र मिश्र ने कहा था कि, मंदिर निर्माण समिति करोड़ों रामभक्तों को आश्वस्त करना चाहती है कि मंदिर निर्माण में कोई खामी नहीं है और न ही कोई लापरवाही बरती गई है।
गौरतलब है कि मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने निर्माण कार्य में लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया था। दावा किया था कि, यह दूसरी बार है जब मंदिर की छत से पानी टपक रहा है। पहली बारिश में भी मंदिर की छत से पानी का रिसाव हुआ था। उस समय भी उन्होंने विरोध किया तो कहीं जाकर पानी की निकासी हुई थी। आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा था कि राम लला के भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण में देश के नामचीन इंजीनियर लगे हैं, बावजूद इसके यह हाल है।
हल्की बारिश में ही राम पथ की सड़क भी धंसी
हालांकी देखा जाए तो अयोध्या में प्री मानसून की हल्की बारिश में ही राम पथ की सड़क भी धंसने लगी है। सहादतगंज से नया घाट तक लगभग साढे़ 13 किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम हाल ही में पूरा हुआ है। इन जगहों पर गहरे गड़ढे हो गए थे। इधर राम मंदिर की छत से पानी टपकने के मुद्दे पर अब मुख्य पुजारी सत्येंद्र मिश्र और श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय अब आमने-सामने होते दिख रहे हैं। ऐसे में अब करोड़ों रामभक्तों ओह-पोह की स्थिती में है कि, आखिर सच क्या है।
जानकारी दें कि, प्राण प्रतिष्ठा दिन के पश्चात से ही लगभग एक लाख से एक लाख पन्द्रह हज़ार भक्त प्रतिदिन रामलला के बाल रूप के दर्शन को आ रहे हैं , प्रात: 6:30 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक दर्शन के लिए प्रवेश होता है। किसी भी भक्त को अधिक से अधिक एक घण्टा दर्शन के लिए प्रवेश, पैदल चलकर दर्शन करना, बाहर निकल कर प्रसाद लेने में लग जाता है।
