GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार, फोटो- सोशल मीडिया
Ayodhya GST Deputy Commissioner Fake Certificate: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात राज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा अब एक कानूनी और पारिवारिक विवाद का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में पद छोड़ने का दावा करने वाले प्रशांत पर उनके ही सगे भाई ने फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अयोध्या संभाग में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने हाल ही में अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति किए गए अपमानजनक बयानों से आहत हैं। उन्होंने खुद को संवेदनशील बताते हुए कहा था कि जिस सरकार का वे वेतन लेते हैं, उसके मुखिया का अपमान वे सहन नहीं कर सकते।
हालांकि, इस इस्तीफे के पीछे की कहानी तब बदल गई जब उनके सगे बड़े भाई, डॉ. विश्वजीत सिंह ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। विश्वजीत का आरोप है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी और अब जब जांच का शिकंजा कसने लगा, तो उन्होंने इस्तीफे का नाटक रचा ताकि संभावित रिकवरी और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, प्रशांत ने सरकारी नौकरी पाने के लिए जिस आंख की बीमारी का सहारा लेकर दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाया, वह चिकित्सकीय रूप से 50 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को होना लगभग नामुमकिन है। भाई का दावा है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ साल 2021 में ही आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी और दोबारा जांच की मांग की थी।
इस शिकायत के आधार पर मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत सिंह को मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए दो बार समन जारी किया था। लेकिन, सूत्रों और भाई के दावों के मुताबिक, प्रशांत एक बार भी बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं हुए। यह अनुपस्थिति उन पर लगे आरोपों को और अधिक बल देती है कि वे अपनी शारीरिक स्थिति की वास्तविक जांच से डर रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और नया मोड़ तब आया जब विश्वजीत सिंह का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी मऊ को लिखा गया था, जिसमें प्रशांत के दिव्यांग प्रमाण पत्र की गहनता से दोबारा जांच करने का आग्रह किया गया था। अब CMO मऊ ने इस मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है, जिससे प्रशांत सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के सरवा गांव के निवासी हैं। उनके करियर की शुरुआत सहारनपुर में पहली तैनाती के साथ हुई थी और 21 अक्टूबर 2023 को उन्हें अयोध्या में पोस्टिंग मिली थी। जहां एक तरफ प्रशांत अपने इस्तीफे को ‘अविमुक्तेश्वरानंद’ द्वारा सीएम योगी के खिलाफ की गई टिप्पणी का विरोध बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक गलियारों में उनके भाई के खुलासे ने हड़कंप मचा दिया है।
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अब प्रशासन और जनता की निगाहें मेडिकल बोर्ड की आगामी रिपोर्ट और मऊ स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी हैं। यदि फर्जीवाड़े के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल सेवा से इस्तीफा होगा, बल्कि उनके पूरे करियर और अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी का मामला भी बन सकता है।