राघव चड्ढा (सोर्स-सोशल मीडिया)
AAM Aadmi Party News: आम आदमी पार्टी के अंदर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी पहले से ही दबाव में है और अब राज्यसभा में हुए एक बड़े बदलाव ने अंदरूनी खींचतान को फिर उजागर कर दिया है। पार्टी ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर राघव चड्ढा को पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा, एक मीडिया रिपोर्ट तो यह दावा भी कर रही है कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र लिखकर यह भी कहा है कि चड्ढा को पार्टी के कोटे के तहत बोलने का समय न दिया जाए। ऐसे में ‘आप’ के नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल का बयान भी सामने आया है।
नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पार्टी की एक सामान्य प्रोसेस है और इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है। नेतृत्व के पदों में इस तरह के बदलाव एक निरंतर प्रक्रिया है। पहले एनडी गुप्ता जी उप-नेता थे फिर राघव जी ने यह ज़िम्मेदारी संभाली और अब यह ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी गई है। कल, किसी और को भी यह अवसर मिल सकता है। पार्टी चाहती है कि हर सांसद और नेता अलग-अलग भूमिकाओं में काम करके सीखे और अनुभव प्राप्त करे और मुझे यह ज़िम्मेदारी इसलिए दी गई है ताकि मैं अपने प्रशासनिक और राजनीतिक कौशल को विकसित कर सकूँ। राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने की अटकलों पर, उन्होंने आगे कहा कि यह अफवाहें हैं, इस तरह की बातें अक्सर चलती रहती हैं और इन्हें ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
VIDEO | Parliament Session: AAP MP Ashok Mittal on party removing Raghav Chadha as Rajya Sabha Deputy Leader says, “Such changes in leadership positions are a continuous process. Earlier, ND Gupta ji was Deputy Leader, then Raghav ji took over, and now I have been given the… https://t.co/IsOsrnIHN3 pic.twitter.com/hqs4OOROVm — Press Trust of India (@PTI_News) April 2, 2026
जब किसी नेता को अचानक इस तरह पद से हटाया जाए, बोलने का अवसर भी सीमित कर दिया जाए और फिर कहा जाए कि इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है तो यह बात सहज नहीं लगती। आमतौर पर राजनीति में ऐसे फैसले बिना ठोस कारण के नहीं लिए जाते। राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के सबसे प्रमुख और मीडिया-फ्रेंडली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के साथ-साथ उनकी पहचान एक स्मार्ट और आक्रामक नेता की रही है। ऐसे में उन्हें अचानक किनारे करना इस बात का संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कुछ न कुछ जरूर चल रहा है।
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दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ‘आप’ लंबे समय से अपने पॉलीटिकल डाउनफॉल से गुजर रही है। ऐसे में अगले साल यानी 2027 में पंजाब में चुनाव भी है। इस बीच ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी के पास बचा हुआ सबसे बड़ा किला पंजाब ही है। ऐसे में कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के अंदर यह तय करने की कोशिश हो रही है कि आगे कैसे से नेता को कितनी अहमियत दी जाए और राघव चड्ढा का हटाया जाना इसी बड़ी उठापटक का एक हिस्सा लगता है।