केंद्रीय मंत्री अमित शाह, (सोर्स- संसद टीवी)
Home Minister Parliament Speech: देश की संसद में सोमवार का दिन राजनीतिक तपिश भरा रहा, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने करीब 90 मिनट तक नक्सलियों और उनके समर्थकों के खिलाफ मोर्चा संभाला। काफी देर तक सभी को सुन लेने के बाद शाह जब बोलने के लिए उठे, तो उनके निशाने पर सीधे तौर पर कांग्रेस और उसका शीर्ष नेतृत्व था।
अपने भाषण के माध्यम से शाह ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह समय आ गया है। सदन में अमित शाह ने सबसे तीखा हमला नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बोला। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी कई मौकों पर ऐसे लोगों और संगठनों के साथ खड़े दिखाई दिए हैं जो नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं।
शाह ने पुराने पन्ने पलटते हुए याद दिलाया कि 2010 में ओडिशा में राहुल गांधी लाडो सिकोका के साथ दिखे थे और 2018 में हैदराबाद में उन्होंने ‘गद्दार’ से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं, गृह मंत्री ने यहां तक कह दिया कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी उन संगठनों की भागीदारी रही है जिनका इतिहास नक्सलवाद से जुड़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते राहुल गांधी खुद नक्सलवादी विचारधारा की ओर झुक गए हैं।
अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का जिक्र करते हुए ‘नेशनल एडवाइजरी काउंसिल’ (NAC) पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एक ‘एक्स्ट्रा-कॉन्स्टिट्यूशनल फोरम’ बताया और दावा किया कि इसके कुछ सदस्य सीधे तौर पर नक्सलियों से सांठगांठ रखते थे। इस दौरान उन्होंने हर्ष मंदर, नंदिनी सुंदर और रामचंद्र गुहा जैसे बुद्धिजीवियों का भी उल्लेख किया।
शाह का तर्क था कि जब नीति निर्धारण करने वाले मंचों पर ऐसे लोग बैठे हों जो नक्सलियों के प्रति नरम रुख रखते हों, तो सुरक्षा बलों का मनोबल कैसे बढ़ सकता है? उन्होंने कहा कि 1970 से लेकर अब तक नक्सलवाद को जो वैचारिक खाद-पानी मिला है, उसके लिए कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा ही जिम्मेदार है।
भाषण के दौरान जब विपक्ष ने हंगामा शुरू किया, तो अमित शाह ने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की सरकार है, यहां डरने का कोई स्थान नहीं है। शाह ने साफ किया कि जो लोग हथियार उठाएंगे, उनके खिलाफ सुरक्षा बल पूरी ताकत से कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने विपक्ष के उस पुराने तर्क को भी सिरे से खारिज कर दिया कि गरीबी की वजह से नक्सलवाद फैला है। शाह ने जोर देकर कहा कि असल में ‘नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली है’, क्योंकि इन गिरोहों ने विकास की सड़कों और स्कूलों को जंगलों तक पहुंचने ही नहीं दिया। उन्होंने संकल्प दोहराया कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा।
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गृह मंत्री अमित शाह ने भावुक होते हुए सदन को बताया कि नक्सली हिंसा में अब तक लगभग 20 हजार निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस की ‘समर्थन वाली राजनीति’ को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। चर्चा की शुरुआत में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी अपने दादाजी की हत्या की दर्दनाक कहानी सुनाई, जिन्हें नक्सलियों ने मार दिया था और आज तक उनके अवशेष भी नहीं मिले। अमित शाह ने अंत में कहा कि यह मामला अब केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनता की अदालत में ले जाया जाएगा।