सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
Parliament Security Scare: संसद परिसर में सोमवार को अचानक खतरे का सायरन बजने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं। दरअसल, प्रवेश द्वार पर एक कार के पास को सुरक्षा सिस्टम पढ़ नहीं पाया। पास स्कैन न होने की वजह से एंट्री गेट पर लगा अलार्म बज उठा, जिसके बाद वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया।
यह घटना संसद भवन के प्रवेश द्वार पर उस समय हुई, जब एक वाहन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा प्रणाली वाहन के पास को रीड नहीं कर सकी, जिससे सायरन बजने लगा। अलार्म बजते ही सुरक्षा में तैनात जवान तुरंत सक्रिय हो गए और वाहन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अपनी-अपनी पोजीशन ले ली।
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर वाहन को वहीं रोक दिया ताकि संसद परिसर में किसी भी तरह की अनधिकृत एंट्री न हो सके। इस दौरान सीआईएसएफ के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए पूरे इलाके को घेर लिया और स्थिति पर नजर बनाए रखी। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने वाहन और उसके पास की गहन जांच शुरू कर दी।
भारतीय संसद की सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस संभालती है। संसद परिसर की सुरक्षा तीन स्तरों में की जाती है, जिसमें सीआरपीएफ, दिल्ली पुलिस और संसद की अपनी सुरक्षा टीम शामिल होती है। ये सभी एजेंसियां मिलकर संसद भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
संसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी ज्वाइंट सेक्रेटरी (सुरक्षा) के पास होती है, जो पूरे संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते हैं। इसके अलावा लोकसभा और राज्यसभा के अलग-अलग डायरेक्टर (सुरक्षा) भी होते हैं, जो अपने-अपने सदनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर नजर रखते हैं। ये दोनों पद लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय के तहत काम करते हैं।
संसद परिसर में कुल 12 प्रवेश द्वार हैं। इनमें से कुछ गेट से नियमित आवाजाही होती है, जबकि कुछ गेट आमतौर पर बंद रहते हैं। हालांकि सभी गेटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है।
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जिन गेटों से आमतौर पर प्रवेश और निकास होता है, वहां सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस संयुक्त रूप से संभालती हैं। यहां आने वाले हर व्यक्ति की सघन जांच की जाती है। सांसदों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की गाड़ियों पर विशेष स्टिकर लगे होते हैं, जिन्हें कैमरों की मदद से स्कैन कर लिया जाता है और उसी आधार पर उन्हें प्रवेश की अनुमति मिलती है।