भूख से गुस्से में व्यक्ति (सौ. फ्रीपिक)
Hangry Symptoms: अक्सर देखा जाता है कि खाली पेट लोग छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाते हैं। विशेषज्ञ इसे हैंग्री (Hangry) होना कहते हैं। जर्मनी के विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन के अनुसार यह स्थिति मन की कमजोरी नहीं बल्कि खून में गिरते ग्लूकोज और तनाव बढ़ाने वाले हार्मोनों का मिला-जुला परिणाम है।
अगर आपको भी भूख लगने पर बेचैनी और गुस्सा महसूस होता है तो आप अकेले नहीं हैं। म्यूनिख (जर्मनी) के कई विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन ने यह साबित कर दिया है कि भूख किस तरह इंसान के व्यवहार को पूरी तरह बदल देती है। इस अध्ययन में यह सामने आया है कि भूख के दौरान होने वाला चिड़चिड़ापन असल में एक जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब हम लंबे समय तक कुछ नहीं खाते तो हमारे खून में ग्लूकोज (शक्कर) का स्तर तेजी से गिरने लगता है। ग्लूकोज हमारे मस्तिष्क के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। जैसे ही इसकी कमी होती है दिमाग को खतरे का संकेत मिलता है।
हार्मोनल असंतुलन और आक्रामकता ग्लूकोज का स्तर गिरने पर शरीर इसे संतुलित करने के लिए कुछ खास हार्मोन रिलीज करता है। इनमें कोर्टिसोल (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) और एड्रेनालाईन (खतरे की स्थिति में सक्रिय होने वाला हार्मोन) शामिल हैं। ये वही हार्मोन हैं जो इंसान को लड़ो या भागो (Fight or Flight) वाली स्थिति में ले जाते हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों में भूख लगने पर अचानक आक्रामकता और गुस्सा बढ़ जाता है।
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दिमाग पर नियंत्रण खोना ग्लूकोज की कमी दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो हमारी भावनाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखने में मदद करता है। जब दिमाग के पास पर्याप्त ईंधन (ग्लूकोज) नहीं होता तो भावनाओं को संभालने की क्षमता कम हो जाती है जिससे इंसान छोटी-छोटी बातों पर भी नियंत्रण खो देता है।
जानकारी के अनुसार स्वस्थ लोगों के लिए हैंग्री होना कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन जो लोग पहले से ही किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं बहुत कमजोर हैं या विशिष्ट दवाइयां ले रहे हैं उनके लिए ब्लड शुगर का इतना गिरना हानिकारक हो सकता है। ऐसे लोगों को समय पर छोटे-छोटे मील लेने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर में ग्लूकोज का स्तर बना रहे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।