Down Syndrome Baby: जानिए किन कारणों से बढ़ता है इस बीमारी का खतरा, कैसे करें बचाव
कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आप सावधानी नहीं बरतते है तो बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। आखिर प्रेग्नेंसी के दौरान कौन सी गलतियां होती है जो डाउन बेबी सिंड्रोम को बढ़ा देती है।
- Written By: दीपिका पाल
कैसे पनपता है डाउन बेबी सिंड्रोम (सौ.सोशल मीडिया)
Down Syndrome Baby : सेहत का ख्याल हमेशा रखना बेहद जरूरी होता है हर व्यक्ति के जीवन में कई दौर आते है जो उसे बेहतर बनाने और उस दौर में ख्याल रखने में मदद करते है। महिलाओं के जीवन में शादी के बाद मां बनने का एक लम्हा आता है जहां पर महिला की जिंदगी बदल जाती है। प्रेग्नेंसी के दौर से लेकर डिलीवरी तक महिलाओं को सेहत का बेहतर ख्याल रखना जरूरी होता है।
कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आप सावधानी नहीं बरतते है तो बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। यहां पर आपने डाउन बेबी सिंड्रोम के बारे में जानकारी ली होगी आखिर प्रेग्नेंसी के दौरान कौन सी गलतियां होती है जो इस बीमारी को बढ़ाने का काम करती है।
कैसे पनपता है ये डिसऑर्डर
आपको बताते चलें कि, डाउन बेबी सिंड्रोम एक तरह से आनुवांशिक डिसऑर्डर होता है जो महिलाओं के गर्भ में पैदा होता है और इसका मुख्य कारण माता-पिता की कुछ गलतियां हो सकती हैं। दरअसल इस डिसऑर्डर में बच्चे के शरीर की सेल्स में एक्स्ट्रा क्रोमोसोम पाया जाता है. हर इंसान में 23 जोड़ी गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों में 21वें गुणसूत्र की एक एक्स्ट्रा कॉपी होती है। मानसिक और फिजिकल ग्रोथ में असर पड़ता है।
सम्बंधित ख़बरें
बच्चे के साथ अपनी सेहत का भी रखें ख्याल! डिलीवरी के बाद शुरुआती 6 हफ्तों में शरीर को मजबूत बनाएंगे ये नुस्खे
Eye Care: गर्मियों में आंखों की जलन ने कर दिया है बुरा हाल? अपनाएं सिर्फ यह एक नुस्खा; मिनटों में मिलेगा आराम
चंद्रपुर में प्रदूषण कम करने के लिए जल्द होगी उद्यमियों की बैठक, मंत्री ने एमपीसीबी अधिकारियों को दिए निर्देश
Sugarcane Juice Side Effects: गन्ने का जूस पीने के हैं शौकीन? जानें किन लोगों को इससे बना लेनी चाहिए दूरी
इन गलतियों से बढ़ता है डाउन सिंड्रोम का खतरा
आपको बताते चलें कि, प्रेग्नेंसी के दौरान की गई गलतियां डाउन सिंड्रोम बीमारी के खतरे को बढ़ा देती है चलिए जानते है इसके बारे में…
1. ज्यादा उम्र में प्रेगनेंसी
अगर महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो डाउन सिंड्रोम होने का खतरा ज्यादा होता है. उम्र बढ़ने के साथ एग्स की क्वालिटी कम होने लगती है, जिससे जेनेटिक डिसऑर्डर का जोखिम बढ़ जाता है.
2-फैमिली हिस्ट्री की अनदेखी
अगर परिवार में पहले से डाउन सिंड्रोम के मामले रहे हैं, तो डॉक्टर से जेनेटिक काउंसलिंग करवानी चाहिए. कई बार अनुवांशिक कारणों से भी यह समस्या आ सकती है. ऐसे में लापरवाही से बचना चाहिए.
3. पिता बनने की ज्यादा उम्र
सिर्फ मां की उम्र ही नहीं, बल्कि पिता की उम्र भी डाउन सिंड्रोम के खतरे को बढ़ा सकती है. शोध के मुताबिक, 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों के शुक्राणु (Sperm) में जेनेटिक म्यूटेशन की आशंका ज्यादा होती है, जिससे बच्चे में क्रोमोसोमल असामान्यता हो सकती है.
4. रेडिएशन और टॉक्सिन के संपर्क में आना
अगर गर्भावस्था के दौरान महिला रेडिएशन या हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आती है, तो इससे बच्चे की कोशिकाओं में जेनेटिक बदलाव हो सकते हैं. इसलिए प्रेगनेंसी में ज्यादा ऐसी जगहों पर जाने से बचना चाहिए.
5. प्रेगनेंसी में अनहेल्दी लाइफस्टाइल
अगर प्रेगनेंसी के दौरान मां सही पोषण नहीं लेती या नुकसानदायक चीजों का सेवन करती है, तो फीटस यानी भ्रूण का विकास प्रभावित हो सकता है. इसकी वजह से जेनेटिक गड़बड़ी हो सकती है.
प्रेगनेंसी में शराब-सिगरेट पीना, जंक फूड और असंतुलित आहार, फोलिक एसिड और जरूरी पोषक तत्वों की कमी, इस बीमारी का कारण बन सकता है.
6. रेडिएशन और टॉक्सिन के संपर्क में आना
अगर गर्भावस्था के दौरान महिला रेडिएशन या हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आती है, तो इससे बच्चे की कोशिकाओं में जेनेटिक बदलाव हो सकते हैं. इसलिए प्रेगनेंसी में ज्यादा ऐसी जगहों पर जाने से बचना चाहिए.
7. प्रेगनेंसी से पहले हेल्थ चेकअप न कराना
अगर महिला किसी पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या थायरॉइड से पीड़ित है और उसका सही इलाज नहीं हो रहा है, तो इससे बच्चे में क्रोमोसोमल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ सकता है.
डाउन सिंड्रोम से कैसे करें बचाव
प्रेगनेंसी की सबसे सही उम्र 25 से 30 साल मानी जाती है, इसी दौरान बेबी प्लान करें.
अगर फैमिली में पहले से कोई जेनेटिक बीमारी रही है तो पहले टेस्ट कराएं.
फोलिक एसिड और पोषण का ध्यान रखें. इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
धूम्रपान, शराब और नशे से बचें.
रेडिएशन और टॉक्सिन से बचें. पॉल्यूशन से दूर रहें.
ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और हार्मोनल बैलेंस पर नजर रखें.
