क्या आप भी टॉयलेट इस्तेमाल करते समय करती हैं ये 3 गलतियां? यूरिन इंफेक्शन से बचने के लिए बदलें अपनी ये आदतें

Toilet Hygiene Mistakes: कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां यूरिन इंफेक्शन जैसी समस्या को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में टॉयलेट इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई और सही आदतों का ध्यान जरूरी है।
Urinary Tract Infection Prevention
टॉयलेट हाईजीन (सौ. फ्रीपिक)
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 UTI Prevention Tips: आजकल महिलाओं में यूरिन इन्फेक्शन (UTI) एक गंभीर साइलेंट किलर बनता जा रहा है। गलत लाइफस्टाइल, कम पानी पीना और टॉयलेट हाइजीन में लापरवाही इसकी मुख्य वजह है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते आदतों में सुधार न किया जाए, तो यह संक्रमण किडनी तक फैलकर जानलेवा साबित हो सकता है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी UTI अब केवल एक सामान्य समस्या नहीं रह गई है बल्कि मेडिकल रिसर्च के अनुसार यह महिलाओं के गुर्दों (Kidneys) को स्थायी नुकसान पहुँचाने वाली एक बड़ी वजह बनती जा रही है। अक्सर महिलाएं शुरुआती जलन और दर्द को नजरअंदाज कर देती हैं जो आगे चलकर गंभीर संक्रमण का रूप ले लेता है।

टॉयलेट हाइजीन

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश महिलाएं टॉयलेट इस्तेमाल करते समय इन 3 बुनियादी बातों का ध्यान नहीं रखतीं, जो संक्रमण की असली जड़ हैं।

पेशाब रोकना

काम की व्यस्तता या बाहर गंदे टॉयलेट के डर से लंबे समय तक यूरिन रोकना बैक्टीरिया को ब्लैडर में पनपने का मौका देता है।

गलत सफाई तकनीक

टॉयलेट इस्तेमाल के बाद पीछे से आगे की ओर सफाई करना मलाशय के बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक तक पहुँचा देता है। हमेशा आगे से पीछे की ओर सफाई करनी चाहिए।पर्याप्त पानी न पीने से बैक्टीरिया शरीर से बाहर फ्लश नहीं हो पाते और संक्रमण तेजी से फैलता है।

प्रोबायोटिक्स

मेडिकल स्टडीज बताती हैं कि बार-बार इन्फेक्शन होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में 'अच्छे बैक्टीरिया' की कमी है। यहाँ प्रोबायोटिक्स रामबाण साबित होते हैं। ये ऐसे सूक्ष्म जीव हैं जो शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकते हैं। प्रोबायोटिक्स हमारे शरीर की एपिथीलियल बैरियर को मजबूत बनाते हैं। यह बैरियर एक सुरक्षा दीवार की तरह काम करता है, जो बाहरी कीटाणुओं को शरीर के अंगों में प्रवेश करने से रोकता है। प्रोबायोटिक्स न केवल सूजन कम करते हैं बल्कि जलन और दर्द से भी तुरंत राहत दिलाते हैं।

बचाव के लिए क्या करें

डॉक्टरों की सलाह है कि इस समस्या से बचने के लिए अपनी डाइट में 'फर्मेंटेड फूड्स' जैसे ताजी दही, छाछ और प्रोबायोटिक ड्रिंक्स को नियमित रूप से शामिल करें। ये चीजें शरीर के प्राकृतिक बैक्टीरियल बैलेंस को बनाए रखती हैं।

इसके अलावा दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। सूती अंडरवियर का चुनाव करें और पर्सनल हाइजीन का सख्त ध्यान रखें। याद रखें, एक छोटी सी सावधानी आपको बड़े मेडिकल ऑपरेशन और किडनी की समस्याओं से बचा सकती है।

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