क्या होता है फेस स्ट्रोक, इसके लक्षण जानकर तुरंत करें ये आयुर्वेदिक उपाय
Face Stroke Symptoms: फेस स्ट्रोक में बिना किसी संकेत के अचानक से आपका चेहरा टेढ़ा हो जाए, होंठ या आंख का हिस्सा हिलना बंद कर दे या मुस्कुराते समय चेहरा एक तरफ झुक जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
फेस स्ट्रोक की समस्या ( सौै. सोशल मीडिया)
Face Stroke: दुनियाभर में कई बीमारियां मौजूद है जिसका किसी ना किसी अंग के प्रभावित होने से संबंध होता है। कुछ बीमारियां या स्वास्थ्य समस्याएं अचानक हो जाती है। इसमें ही एक शामिल है फेस स्ट्रोक, इसमें बिना किसी संकेत के अचानक से आपका चेहरा टेढ़ा हो जाए, होंठ या आंख का हिस्सा हिलना बंद कर दे या मुस्कुराते समय चेहरा एक तरफ झुक जाता है। इस प्रकार की समस्या को आयुर्वेद में अर्धांग वायुरोग कहा जाता है इसमें चेहरे की नस प्रभावित हो जाती है तो वहीं पर चेहरे की एक तरफ की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं।
किन कारणों से होता है फेस स्ट्रोक
इस फेस स्ट्रोक की बीमारी के मुख्य कारणों में कई कारण शामिल है। वात दोष का असंतुलन, ठंडी हवा, अनियमित दिनचर्या, तनाव और अधिक शारीरिक परिश्रम शामिल हैं। इसके अलावा, नसों में रक्त प्रवाह की बाधा, वायरल संक्रमण, डायबिटीज, हाई बीपी, स्ट्रोक या नींद की कमी भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
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फेस स्ट्रोक के लक्षण
यहां पर फेस स्ट्रोक के लक्षण में कई लक्षण की पहचान होती है। चेहरे का एक तरफ झुकना, होंठों से हवा न निकल पाना, आंखें पूरी तरह बंद न होना, स्वाद में कमी, सुन्नपन, झनझनाहट और बोलने में अस्पष्टता से की जा सकती है।
अपनाइए आयुर्वेद में ठीक करने के उपाय
आयुर्वेद में फेस स्ट्रोक की समस्या को सही करने के उपाय बताए गए है जो इस प्रकार है…
- सबसे पहले अभ्यंग (तेल मालिश) बेहद फायदेमंद है। महा नारायण तेल, तिल तेल या दशमूल तेल से हल्की मालिश करने से रक्त प्रवाह सुधरता है और मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। रोजाना सुबह या स्नान से पहले 10-15 मिनट की मालिश करनी चाहिए। दूसरा उपाय है नस्य उपचार, जिसमें अनुतैलम या शद्विंदु तेल की 2-2 बूंदें दोनों नासिका छिद्र में डालने से मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बढ़ता है और नसें मजबूत होती हैं। स्वेदन यानी भाप चिकित्सा से जकड़ी नसें खुलती हैं और सुन्नपन कम होता है।
- गंभीर मामलों में पंचकर्म चिकित्सा जैसे बस्ती (औषधीय एनिमा), शिरोधारा और नस्य मिलाकर तंत्रिकाओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसके अलावा, हर्बल औषधियां जैसे अश्वगंधा चूर्ण, रसनादि कषाय, योगराज गुग्गुलु और बलारिष्ट नसों की शक्ति बढ़ाने और सूजन कम करने में मदद करती हैं।
- योग और प्राणायाम भी उपयोगी हैं। मुख व्यायाम जैसे मुस्कुराना, होंठ फुलाना, आंखें बंद-खोलना, भ्रामरी प्राणायाम और अनुलोम-विलोम रक्त प्रवाह और नसों की क्रियाशीलता बढ़ाते हैं। सिंहासन चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
- इसके अलावा, आहार में गर्म, ताजा और सुपाच्य भोजन लें। मूंग दाल, घी, दूध, तिल, बादाम, हरी सब्जियां, अदरक, लहसुन और हल्दी शामिल करें। ठंडी चीजें, बर्फ, कोल्ड ड्रिंक, जंकफूड और अधिक मसाले या तैलीय पदार्थ न खाएं। गुनगुने पानी से चेहरे की हल्की सिकाई करें, दिन में दो बार अदरक और तुलसी का काढ़ा पिएं, नींद पूरी लें और तनाव कम रखें।
आईएएनएस के द्वारा
