एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (सौ. सोशल मीडिया)
Antimicrobial Resistance: किसी भी छोटी बीमारी के लिए हम एंटीबायोटिक्स का सहारा ले लेते है। इन दवाईयों का सेवन करना सेहत के लिए भले ही राहत दे जाता है लेकिन एंटीबायोटिक दवाईयों का ज्यादा सेवन बड़ी गंभीर समस्या को बढ़ा सकती है। हर साल लोगों को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि WHO एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानि एएमआर के खतरे को लेकर चेतावनी देता है।
स्टडी यह कहती है अगर हम एंटीबायोटिक्स का सेवन लगातार करते है तो साल 2050 तक कई संख्या में मौत हो सकती है। अगर आप ज्यादा एंटीबायोटिक्स का सेवन कर लेते है तो यह लेख आपको पढ़ना चाहिए, जानना चाहिए कि, हम सेहत के साथ कैसे खेल रहे है।
इसे लेकर हेल्थ एक्सपर्ट बताते है कि, जब हमारे शरीर के बैक्टीरिया या वायरस इतने ज्यादा मजबूत हो जाएं कि उन पर दवाएं काम न करें तो इसे एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहा जाता है। सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं के लिए हम एंटीबायोटिक्स का सेवन तो कर लेते है लेकिन ज्यादा सेवन सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है शायद यह बात आप नहीं जानते है।
यहां पर विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि WHO की रिपोर्ट की मानें तो, साल 2019 में 12.7 लाख लोगों की मौत सीधे तौर पर एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारण हुई थी।वहीं 49.5 लाख मौतों में एंटीबायोटिक्स का सेवन ही ज्यादा पाया गया है। अगर हम ऐसे ही एंटीबायोटिक्स का सेवन करते है तो, जल्द ही साइलेंट पैन्डेमिक की चपेट में आ सकते है।
यहां पर भारत में एंटीबायोटिक्स के सेवन के आंकड़े जान लें, तो हर साल यहां दवाई का अरबों डोज बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर लैसेंट ई क्लिनिकल मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 83 प्रतिशत भारतीय रोगियों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस ऑर्गनिज्म पाए गए हैं। इन मरीजों में एंटीबायोटिक का असर खत्म हो जाता है। इस स्टडी में बताया गया है कि, एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं से गुजरने वाले मरीजों में एमडीआरओ की मौजूदगी दूसरे देशों की तुलना में कहीं ज्यादा है. भारत में 83 प्रतिशत मरीजों में एमडीआरओ पाया गया है, जबकि इटली में 31.5 प्रतिशत अमेरिका में 20.1 प्रतिशत नीदरलैंड में 10.8 प्रतिशत मामलों में यह समस्या दिखी है। आंकड़ों से समझ सकते है कि, हम एंटीबायोटिक्स से शरीर को सुरक्षित नहीं रख रहे है बल्कि अपनी जान के लिए खतरा बना रहे है।
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यहां पर हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, अगर हम सर्दी-जुकाम जैसी छोटी समस्याओं के लिए एंटीबायोटिक्स की जगह घरेलू नुस्खों का सहारा लेते है तो स्थिति कंट्रोल में आ सकती है। अगर सही समय पर कदम नहीं उठाया जाता है तो, स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा आप डॉक्टर को बिना दिखाएं एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे है तो यह सेहत के लिए सही नहीं होता है।