अब एड़ी का दर्द होगा चुटकियों में छूमंतर, NIT राउरकेला ने तैयार की स्वदेशी फोर्स प्लेट
Benefits of Indigenous Force Plate: दर्ददायक बीमारी पर आराम के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला ( NIT राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने एक कम लागत वाली और स्वदेशी फोर्स प्लेट विकसित की है।
- Written By: दीपिका पाल
स्वदेशी फोर्स प्लेट (सौ. डिजाइन फोटो)
Indigenous Force Plate: उम्र बढ़ने के साथ या कम उम्र में ही लोगों को कई गंभीर बीमारियां घेर लेती है। इसमें ही एड़ी का दर्द हर उम्र के लोगों को सताता है। एड़ी का दर्द वयस्कों में पैरों की सबसे आम बीमारियों में से एक है। यह अक्सर प्लांटर फेशिया (ऊतकों की एक पट्टी जो पैर के आर्क को सहारा देती है) के अत्यधिक भार से जुड़ा होता है।
दर्ददायक बीमारी पर आराम के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने एक कम लागत वाली और स्वदेशी फोर्स प्लेट विकसित की है जो काफी किफायती है। इसे लेकर रिसर्चर ने दावा किया है कि, इससे एड़ी के दर्द से निजात मिलेगी।
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कैसे तैयार हुई स्वदेशी प्लेट
एनआईटी राउरकेला द्वारा तैयार स्वदेशी फोर्स प्लेट को एड़ी के दर्द पर राहत दिलाने के लिए तैयार किया है। नई फोर्स प्लेट बहु-अक्षीय भू-प्रतिक्रिया बल (जीआरएफ) को मापकर काम करती है। फोर्स प्लेट से मापे गए जीआरएफ का उपयोग असामान्य चाल पैटर्न का निदान करने के लिए किया जाता है। यह उपकरण भारत में खेल शिक्षाविदों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में उपयोगी होगा, क्योंकि यह मौजूदा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में किफायती है।
इतना ही नहीं इस प्लेट को लेकर कहा गया है कि, मानव मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य के विश्लेषण के लिए आवश्यक क्लीनिकल उपकरण के रूप में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। उच्च लागत और भारतीय निर्माताओं की कमी के कारण, भारत में इसकी उपलब्धता सीमित रही है।
कैसे मिलता है फायदा
इस नए फोर्स प्लेट को लेकर एनआईटी राउरकेला के प्रो. ए. तिरुगनम ने जानकारी दी है। एनआईटी राउरकेला के प्रो. ए. तिरुगनम ने कहा, “ज्यादातर न्यूरोमस्कुलर विकार व्यक्ति के चाल-ढाल को प्रभावित करते हैं। चूंकि चाल के लिए मांसपेशियों की ताकत और संतुलन के सटीक समन्वय की आवश्यकता होती है, इनमें से किसी में भी गड़बड़ी चलने के तरीके और संबंधित जीआरएफ को बदल सकती है।””कुछ सामान्य न्यूरोमस्कुलर रोग जैसे मायोपैथी, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, न्यूरोमस्कुलर जंक्शन विकार, स्पास्टिसिटी, अटैक्सिया, पार्किंसंस रोग, सेरेब्रल पाल्सी आदि जीआरएफ को बदल सकते हैं। जीआरएफ में इन असामान्यताओं का निदान फोर्स प्लेट का उपयोग करके किया जा सकता है।”फोर्स प्लेट को मानव मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य के विश्लेषण के लिए आवश्यक क्लीनिकल उपकरण के रूप में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। उच्च लागत और भारतीय निर्माताओं की कमी के कारण, भारत में इसकी उपलब्धता सीमित रही है।
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कितनी होती है कीमत
यहां पर इसकी कीमत को लेकर खुलासा किया है। फोर्स प्लेट की कीमत आमतौर पर 30-50 लाख रुपये के बीच होती है।भारत में स्वदेशी रूप से विकसित फोर्स प्लेट की लागत लगभग 8 से 10 लाख रुपये के बीच होगी, जिससे लागत में लगभग 70-85 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे यह एक किफायती विकल्प बन जाएगा।
आईएएनएस के मुताबिक
