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Mobile Phone Addiction In Children: क्या आपका बच्चा भी हर वक्त फोन में रहता है? जानें इसके गंभीर नुकसान
- Written By: रीता राय सागर
Mobile Addiction In Children: आज के समय में बच्चों के हाथ में हर वक्त मोबाइल दिखता है। कभी खाना खिलाने, ध्यान भटकाने के लिए, तो कभी उन्हें मस्ती से रोकने के लिए। क्या बच्चों का व्यवहार बदल रहा है।

मोबाइल फोन (फोटो.सोशल मीडिया)
Screen Time Impact On Children Brain: बच्चों की जिद से पीछा छुड़ाने के लिए अकसर उनके माता-पिता उन्हें मोबाइल फोन दे देते हैं। आपका बच्चा भले ही उस वक्त इससे शांत हो जाता है, लेकिन लंबे समय में इसके कई गुना नुकसान हो सकते हैं। काफी देर तक स्क्रीन पर समय बिताने से बच्चों का दिमाग अंडर डेवलप रह जाता है।
दुनिया भर में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि कम उम्र में बच्चों को स्मार्टफोन देना उनके मानसिक विकास को बाधित करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल, गैजेट्स और ज्यादा टीवी देखने से बच्चों का भविष्य खराब होता है। इससे वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा भी बढ़ता है।
पैरेंट्स क्या करें
अक्सर जब बच्चा छोटा होता है तो पैरेंट्स उन्हें पास बिठाकर मोबाइल फोन दिखाते हैं। बाद में बच्चों को इसकी आदत लग जाती है, फिर वो बिना मोबाइल फोन के कोई भी काम नहीं करते हैं। पैरेंट्स को सबसे पहले तो अपने बच्चों को इलेक्ट्रॉनिग गैजेट्स से दूर रखना चाहिए। उनका स्क्रीन टाइम जीरो करने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए उनका धीरे-धीरे उनका ध्यान दूसरी चीजों पर शिफ्ट करना चाहिए।
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उनका फोकस किसी क्रिएटिव काम की ओर लगाएं। साथ ही सोने की टाइम-टेबल पर भी काम करें और उसे फिक्स करें। बच्चों को आउटडोर एक्टिविटीज के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसा करने के लिए मां-बाप को पहले खुद में सुधार लाना भी जरूरी है। बच्चों के सामने पेरेंट्स को भी फोन से दूरी बनानी होगी और स्पोर्ट्स एक्टिविटीज में हिस्सा लेना चाहिए।
मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों की समस्याएं, नींद में कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और व्यवहार संबंधी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 13 साल से छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन देना किसी खतरे से कम नहीं है।
मोबाइल की लत (फोटो.सोशल मीडिया)
ध्यान और व्यवहार पर असर(Lack Of Focus In Children)
मोबाइल फोन का ज्यादा उपयोग बच्चों की एकाग्रता को प्रभावित करता है। लगातार बदलती स्क्रीन, तेज आवाजें और रंगीन ग्राफिक्स बच्चों के ब्रेन को उत्तेजित करती है, जिससे उनका एडिक्शन बढ़ता है और वो कुछ नया देखने की चाह में स्क्रीन को स्क्रोल करते जाते है। इससे बच्चों में सब्र की कमी तो होती ही है, साथ ही बच्चा सामान्य पढ़ाई या शांत एक्टिविटी में भी ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता।
डॉक्टर के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में ध्यान भंग होना, पढ़ाई में रुचि की कमी और कार्यों को अधूरा छोड़ देने जैसी समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। इसके अलावा, मोबाइल छीनने या उपयोग सीमित करने पर बच्चों में गुस्सा, झुंझलाहट और आक्रामक व्यवहार भी देखा जा सकता है।
मोबाइल की लत (फोटो.सोशल मीडिया)
छोटे बच्चों में बोलने में देरी (Delay In Speech)
मोबाइल के अधिक एक्सपोजर से बच्चों में बोलने में देरी की समस्या हो सकती है। बच्चा अपने आसपास लोगों से बात नहीं करते हैं। हर समय बच्चा पूरे फोकस से बिना कुछ बोले फोन देखता है, जिससे उनकी स्पीच में भी देरी होती है। छोटे बच्चे भाषा का ज्ञान और बोलने की कला आमतौर पर माता-पिता और आसपास के लोगों के साथ संवाद करते हुए ही सीखते है। जब बच्चा वास्तविक बातचीत की जगह मोबाइल स्क्रीन पर वीडियो देखने में अधिक समय बिताता है, तो उसकी भाषा सीखने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
वह शब्दों की नकल तो कर सकता है, लेकिन भावनात्मक और सामाजिक व्यवहार को समझने में कठिनाई होती है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से जितना दूर हो सके, रखना चाहिए। इतना ही नहीं बड़े बच्चों के स्क्रीन टाइम को भी सीमित किया जाना चाहिए।
मोबाइल की लत (फोटो.सोशल मीडिया)
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर भी मानते हैं कि मोबाइल फोन को अचानक से या पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि उसका संतुलित और कंट्रोल उपयोग जरूरी है। माता-पिता बच्चों के स्क्रीनटाइम को सीमित करना चाहिए, साथ ही बच्चे स्क्रीन पर कैसा कंटेंट देख रहे है, इस पर भी पेरेंट्स को निगरानी रखनी चाहिए। परिवार के साथ भोजन के समय और सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन का उपयोग बंद कर देना चाहिए। बच्चों को आउटडोर गेम्स, योग, साइकिलिंग और अन्य फिजिकल एक्टिविटीज के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
Mobile phone addiction in children consequences and treatment
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